परचून की दुकान पर बारहसिंगा के सींग, बाघ के दांत और नाखून मिले, दो गिरफ्तार
- 50 हजार में हुआ सौदा, दुकानदार लालच में आकर देने को हुआ तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। वन विभाग की टीम ने शुक्रवार रात को मोदीनगर में राज चौपले के निकट निवाड़ी रोड पर एक परचून की दुकान पर छापा मारा। इस दौरान वहां से बारहसिंगा हिरण के सींग, बाघ के नाखून, दांत और सियार सिंगी बरामद बरामद हुई। वन विभाग के अधिकारी ग्राहक बनकर दुकान पर गए थे। आरोपी तंत्र क्रिया के लिए दुर्लभ प्रजाति के जानवरों के अंग दिल्ली और उत्तराखंड से तस्करों से मंगवाता था। लंबे समय से वह इसमें लिप्त चल रहा था। मामले में वन रक्षक रोहित कुमार की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी दुकानदार सुभाष चंद गोयल और उसके सहायक सूरज को गिरफ्तार किया है।
क्षेत्रीय वन अधिकारी लटूर सिंह ने बताया कि राज चौपले के निकट निवाड़ी रोड स्थित सुभाष चंद की परचून की दुकान पर दुर्लभ प्रजाति के जानवरों के अंग मिलने की सूचना मिली थी। इसी के चलते विभागीय अधिकारी ग्राहक बनकर दुकान पर पहुंचे। अनजान होने के कारण पहले तो दुकानदार ने मना कर दिया लेकिन मुंह मांगी रकम देने की बात कहने पर उसे लालच आ गया। 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। मांगने पर दुकानदार ने दुकान के अंदर गोपनीय स्थान पर रखे बारहसिंगा हिरण के सींग का टुकड़ा, बाघ का दांत और नाखून व सियार सिंगी, 48 हत्था जोड़ी उपलब्ध करा दी। इसके बाद पुलिस को भी बुला लिया गया और आरोपी सुभाष और लंकापुरी निवासी उसके सहायक सूरज को गिरफ्तार कर लिया गया। वन रक्षक रोहित की तहरीर पर पुलिस ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोपियों ने लंबे समय से इस धंधे में लिप्त हाेने की बात कबूली है।
उत्तराखंड, दिल्ली से जुड़ा है कनेक्शन :
पूछताछ में आरोपी सुभाष ने बताया कि दिल्ली खारी बावली क्षेत्र में इस तरह का काम करने पर कुछ तस्कर हैं। उत्तराखंड के भी कुछ लोग उनके संपर्क में हैं, जो आन डिमांड इस तरह के अंग उपलब्ध करा देते हैं। इन अंगों का इस्तेमाल अधिकांश तंत्र क्रिया में किया जाता है। दोनों आरोपी के मोबाइल में उत्तराखंड और दिल्ली के तस्करों के मोबाइल नंबर भी मिले हैंं।
तंत्र विद्या का जानकार है सूरज :
सुभाष के सहायक सूरज ने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को बताया कि वह तंत्र विद्या का जानकार है। वन अधिकारी ने बताया कि किसी को बेटा पैदा होने, नौकरी मिलने, फंसा हुआ काम बनने समेत तमाम कार्य होने का झांसा देकर वह अपने जाल में फंसाते थे। तंत्र विद्या में इन अंगों का इस्तेमाल करने पर काम बनने की गारंटी दी जाती थी। 50 हजार से एक लाख तक का खर्च इसमें बताया जाता था। जानवरों के जिन अंगों की बरामदगी हुई, वह किसी और के लिए मंगवाए गए थे, दुकानदार को उसके लालच ने फंसाने का काम किया। छानबीन में पता चला है कि जड़ी बूटी से जुड़ा काम करने वाले कई और दुकानदार भी इस तरह का काम करते हैं।
तीन साल का कारावास :
वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में कम से कम तीन साल की सजा है। दूसरी बार इस तरह का अपराध करने पर सजा की अवधि बढ़ भी सकती है।
मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जानवरों के जो अंग बरामद हुए हैं, उनकी पुष्टि के लिए वन विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। साक्ष्य जुटाए गए हैं। आरोपियों के मोबाइलों की भी जांच की जा रही है। जल्द ही मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
- रितेश त्रिपाठी, एसीपी, मोदीनगर