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रक्षाबंधन कल, रौनक दिखी बाजारों में

Wed, 17 Aug 2016 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
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राखी - फोटो : अमर उजाला
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रक्षाबंधन नजदीक आते ही बाजारों में रौनक दिखने लगी है। इसी के चलते राखियों, मिठाइयों की दुकान से लेकर मेहंदी लगवाने वालों की भीड़ बाजारों में दिखाई दे रही है।  मंगलवार के दिन भी तुराबनगर मार्केट खुला रहा।
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स्टोन वाली राखियों से सजा है बाजार
इस बार मार्केट में सबसे अधिक स्टोन वाली राखियां आई हैं। रेशम की डोर के साथ स्टोन से बने ओम, फूल, स्वास्तिक आदि की राखियां सबसे अधिक पसंद की जा रही हैं। इन राखियों की कीमत 20 रुपये से लेकर 150 रुपये तक है। इसके अलावा ब्रेसलेट डिजाइन की भी राखियां डिमांड में हैं।

ऑनलाइन बुकिंग भी है जोरों पर
डाक विभाग की देरी और समय पर राखी न मिलने की समस्या को देखते हुए अब लोग ऑनलाइन राखी भेजने पर भरोसा कर रहे हैं। घर बैठे मनपसंद राखियां चुनने के साथ ही रोली-चंदन, थाली, गिफ्ट सभी भेजे जा रहे हैं। देश के सभी हिस्सों की राखी भेजने के साथ विदेश में बसे भाइयों को भी ऑनलाइन राखी भेजी जा रही है।
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सलोनी शर्मा ने बताया कि दुबई में रहने वाले भाई के लिए राखी से एक दिन पहले राखी भेजनेे की बुकिंग कर दी है।

बच्चों के लिए भी हैं राखियां
मार्केट में राजस्थानी लुंबे, भाई-भाभी राखी, सहित बच्चों को लुभाने के लिए उनके मनपसंद कार्टून कैरेक्टर और खिलौने वाली राखियां बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें बच्चों के लिए पिकाचु, एंग्री बर्ड, सिनचैन, टॉम एंड जेरी, छोटा भीम, बालकृष्ण, गणेश, हैरी पॉटर, शक्तिमान सहित बार्बी डाल, बार्बी मोबाइल फोन राखी, चाकलेट राखी आदि हैं। राखी विक्रेता भरत ने बताया कि यह राखियां 30 से 90 रुपये रेंज की है।

रक्षाबंधन पर राहू काल छोड़ पूरे दिन है शुभ मुहूर्त
इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। 18 अगस्त को दोपहर में डेढ़ घंटे छोड़कर बहनें पूरे दिन भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।  पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन भद्रा काल से मुक्त रहेगा, लेकिन दोपहर 1. 30 बजे से 3.00 बजे तक राहु काल रहेगा। इस समय राखी नहीं बांधी जा सकेगी। वैसे दोपहर 12.42 बजे से 1. 30 बजे तक वृश्चिक लग्न रहेगी।

इस लग्न में राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा। इसके अलावा रक्षाबंधन गुरुवार को होने के कारण और शुभ स्थिति बन रही है। यह गुरु का दिन होता है और देव गुरु बृहस्पति ने ही इंद्र को राक्षसों पर विजय पाने के बाद रक्षाबंधन का सुझाव दिया था।
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