गाजियाबाद। दीनागढ़ी निवासी 28 वर्षीय युवक की हालत गंभीर हो गई, जब उसे छह महीने पहले बंदर द्वारा काटे जाने के बाद अचानक रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। युवक ने बंदरों जैसी हरकतें करना शुरू कर दिया। उसके परिवार के सदस्यों ने संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने तुरंत युवक के व्यवहार और लक्षणों को पहचानते हुए उसे दिल्ली के जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया।
अस्पताल की इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) डॉ. खुश्बू सिंह ने बताया कि 18 अप्रैल को इमरजेंसी में युवक को ले आए थे। वह खुद को बंदर की तरह खुजाना और हाथ में चाय-पानी पीने जैसी हरकतें कर रहा था। युवक की पत्नी ने बताया कि करीब छह महीने पहले पति को बंदर ने काटा था, लेकिन तब उन्होंने एंटी रेबीज वैक्सीनेशन या अन्य कोई उपचार नहीं करवाया था। कुछ दिनों से उनके व्यवहार में अचानक बदलाव आया। वह सामान्य तरीके से चीजों का इस्तेमाल करने की बजाय अजीब तरीके से कार्य करने लगा था। इस पर उसके परिवार ने चिंता जताई और उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉ. खुश्बू सिंह ने बताया कि युवक के लक्षणों को पहचानते हुए उसे उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर कर दिया। इसके साथ ही युवक के परिवार के अन्य सदस्यों पिता, भाई, पत्नी और एक साल के बच्चे को भी एंटी रेबीज वैक्सीन दी। जीटीबी अस्पताल में युवक को उपचार दिया गया। इससे उसकी हालत में सुधार हुआ है।
नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि युवक की हालत में सुधार हो रहा है। उसका जीटीबी अस्पताल में उपचार जारी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने पर अपने नजदीकी केंद्र पर एआरवी का टीका अवश्य लगवाएं।