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Ghaziabad News: पुलिस मुठभेड़ के दावों पर उठे सवाल, आरोपी राजन को कोर्ट से जमानत

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गाजियाबाद। पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तारी और अवैध हथियार बरामदगी के दावों पर अदालत में सवाल उठने के बीच आरोपी राजन को जमानत मिल गई। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सात ने मामले की सुनवाई के बाद उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तारी की असली परिस्थितियों को छिपाकर मुठभेड़ की कहानी तैयार की गई। मामले में सह आरोपी सचिन को भी पहले ही जमानत मिल चुकी है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, खोड़ा थाना पुलिस ने दावा किया था कि राजन और उसके साथी सचिन ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से गोलियां चलाई थीं। पुलिसकर्मी इस दौरान बाल-बाल बच गए थे। इसके बाद घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात कही गई। पुलिस ने राजन के कब्जे से 315 बोर का तमंचा, दो जिंदा कारतूस और एक मोबाइल फोन बरामद होने का दावा किया था। सह आरोपी सचिन से भी 315 बोर का तमंचा मिलने की बात कही गई थी।
हालांकि, बचाव पक्ष ने पुलिस के इन दावों को अदालत में चुनौती दी। आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि राजन और सचिन को दो फरवरी 2026 को घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि दोनों को हरिद्वार से पकड़ा गया था। अधिवक्ता के मुताबिक, आरोपियों को पहले खोड़ा थाने लाया गया और वहां उनकी पिटाई की गई। इसके बाद पुलिस ने कथित मुठभेड़ का घटनाक्रम तैयार किया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना में किसी पुलिसकर्मी को गोली नहीं लगी और न ही कोई चोट आई।
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अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि खोड़ा थाने की एक और दो फरवरी की सीसीटीवी फुटेज के साथ आरोपियों की मोबाइल फोन लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच से गिरफ्तारी की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं। इन बिंदुओं को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए गए। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी रहा कि सह आरोपी सचिन की जमानत सत्र न्यायाधीश की अदालत से छह मार्च को मंजूर हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने राजन की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस के मुठभेड़ संबंधी दावों और बचाव पक्ष के आरोपों की सच्चाई का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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