तीन अगस्त 2002 को बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव आढ़ा में बस लूट के बाद हुई मुठभेड़ में फर्जी मुठभेड़ के आरोपी बनाए गए सभी आठ पुलिसकर्मियों को एडीजे-एफटीसी चतुर्थ डॉ. सुरेश कुमार ने साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। एक ओर पुलिसकर्मियों के बरी होने पर मौजूद परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए, तो वहीं दूसरी ओर मुठभेड़ में मारे गए प्रदीप के पिता यशपाल के आंसू थम नहीं रहे थे।
सिकंदराबाद कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी रणधीर सिंह ने तीन अगस्त 2002 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि बुलंदशहर कोतवाली देहात सीमा से टीम के साथ गश्त करते हुए सिकंदराबाद की तरफ लौट रहे थे। गांव आढ़ा मोड़ के निकट बिलसूरी की तरफ से फायरिंग की आवाज सुनाई दी। वह हमराह पुलिसकर्मी कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, मनोज, जीप चालक श्रीपाल, संजीव कुमार, सतेंद्र, तोताराम और रघुराज के साथ मौके पर पहुंचे, वहां पर एक रोडवेज बस से उतरकर तीन बदमाश भागते हुए दिखाई दिए। पुलिस टीम के रोकने पर बदमाशों ने फायरिंग की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सहपानी थाना सिकंदराबाद के रूप में हुई।