गाजियाबाद। बूंदाबांदी और मौसम में बदलाव के बाद जिले में दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इससे बिजली की मांग में भी करीब 150 एमवीए की कमी आई है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचने से बिजली की खपत में कमी आई है, जिससे मांग घटी है। हालांकि, इसके बावजूद लोगों को ट्रिपिंग और बिजली की आवाजाही से राहत नहीं मिल सकी।
मंगलवार को जिले में बिजली की अधिकतम मांग 1850 एमवीए दर्ज की गई थी, जो बुधवार को घटकर 1700 एमवीए रह गई। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार आने वाले दिनों में यदि उमस बढ़ती है तो बिजली की मांग में दोबारा बढ़ोतरी हो सकती है।
बिजली की मांग घटने के बावजूद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती तथा फॉल्ट की समस्या बनी रही। पटेलनगर सेकंड के लोगों का आरोप है कि दिन में करीब तीन घंटे तक बिजली बाधित रही। मुरादनगर के असालतपुर बिजलीघर से जुड़े क्षेत्रों में सुबह तीन बार करीब आधे-आधे घंटे के लिए बिजली आपूर्ति बाधित हुई।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुराना गांव निवासी महावीर यादव ने बताया कि बूंदाबांदी शुरू होते ही बिजली चली गई और दोपहर करीब दो बजे आपूर्ति बहाल हुई।
ऊर्जा निगम के अनुसार, बुधवार को शहर और देहात क्षेत्र से कुल 103 फॉल्ट की शिकायतें दर्ज की गईं। विभाग का कहना है कि बारिश के बाद बढ़ी नमी के कारण जंपर उड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई।
मुख्य अभियंता नरेश भारती ने बताया कि जहां-जहां से शिकायतें प्राप्त हुईं, वहां समय रहते टीम भेजकर समस्या का समाधान कराया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं रही।
सुरक्षा के मद्देनजर बिजली लाइनें भूमिगत करने की मांग
वार्ड-95 की पार्षद रुखसाना सैफी ने दूधेश्वरनाथ मंदिर से गौशाला फाटक तक 11 हजार केवी क्षमता की बिजली लाइन को भूमिगत कराने की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी और मुख्य अभियंता को पत्र भेजा है। पार्षद का कहना है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। इस दौरान जिले के अलावा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूधेश्वरनाथ मंदिर पहुंचते हैं। खुले में गुजर रही बिजली लाइन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लाइन को भूमिगत किए जाने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षा मिल सकेगी।