साहिबाबाद। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने औद्योगिक इकाइयों की निगरानी और ऑडिट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) की मात्रा 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक होगी, वहां एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (एपीसीडी) लगाना या खराब उपकरणों को बदलना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों पर जुर्माना, एनओसी रद्द करने और फैक्टरी बंद करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
सीपीसीबी पहले चरण में औद्योगिक इकाइयों में जागरूकता अभियान चलाकर उद्यमियों का पंजीकरण करा रहा है। पंजीकरण के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें फैक्टरियों का निरीक्षण करेंगी और यह जांचेंगी कि वहां प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक उपकरण निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नहीं।
एक अक्तूबर से औद्योगिक इकाइयों के लिए पीएम उत्सर्जन का मानक 80 से घटाकर 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर कर दिया जाएगा। इसके बाद यदि किसी इकाई से निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन दर्ज होता है तो ऑनलाइन कंटीन्युअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएमएस) के माध्यम से इसकी सूचना सीधे सीपीसीबी को मिलेगी। इसके आधार पर यूपीपीसीबी की टीम मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगी और आवश्यकता पड़ने पर नोटिस जारी करेगी। लगातार उल्लंघन मिलने पर जुर्माना, एनओसी निरस्त करने और इकाई बंद करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
जिले में 380 से अधिक ऐसी औद्योगिक इकाइयां हैं, जहां ओसीईएमएस के जरिए उत्सर्जन की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकांश उद्योगों ने फिल्टर बदलकर पीएम स्तर को 50 तक नियंत्रित कर लिया है, लेकिन करीब 20 से 25 प्रतिशत इकाइयों में अभी भी निर्धारित मानक हासिल नहीं हो सके हैं। ऐसे उद्योगों का सीपीसीबी की टीमें दौरा कर कारणों का अध्ययन कर रही हैं और आवश्यकता के अनुसार एपीसीडी में संशोधन कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। सभी फैक्टरी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि एक अक्तूबर से पहले हर हाल में पीएम उत्सर्जन 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के भीतर सुनिश्चित करें, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।