गाजियाबाद। पुलिस ने किसान नेताओं को मंगलवार को उनके घरों में नजरबंद कर दिया। पूरे दिन वह पुलिस के पहरे में रहे। वहीं, आंदोलन में शामिल होने जा रहे कई नेताओं को रास्ते से समझाकर वापस भेजा गया। किसान नेताओं ने सरकार पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। इसके अलावा ईस्टर्न पेरिफेरल से कुंडली जाने की ओर तड़के ही बैरिकेड लगाकर भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया था। वाहनों को चेकिंग और उनमें सवार लोगों को पूछताछ के बाद आगे जाने दिया गया। मसूरी में ईस्टर्न पेरिफेरल कट और एनएच-09 पर भी जगह जगह पुलिसबल तैनात रहा।
रईसपुर में भाकियू अराजनैतिक गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष राजबीर सिंह के आवास सोमवार रात को ही पुलिस पहुंच गई। मंगलवार को भी पूरे दिन वह पुलिस की निगरानी में रहे। पुलिस के उच्चाधिकारियों ने भी उनसे बात की। इसकी जानकारी मिलने पर उनके समर्थक भी वहां पहुंच गए। पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। राजबीर सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को कमजोर समझने की भूल न करें। पुलिस या प्रशासन का डर दिखाकर किसानों को पीछे नहीं हटाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून किसानों का हक है। यह जब तक नहीं मिलेगा, किसान सड़कों पर ही रहेगा। भाकियू टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह के आवास पर भी पुलिस ने उनको नजरबंद कर दिया। भाकियू चढूनी गुट के राष्ट्रीय महासचिव मनोज नागर, प्रमोद त्यागी, अनुज शर्मा आदि नेताओं की भी पुलिस ने घेराबंदी कर उनको नजरबंद कर दिया।
इसी का नतीजा रहा कि गाजियाबाद से कम संख्या में ही लोग किसानों के दिल्ली के कूच में शामिल होने के लिए नहीं पहुंच सके। बिजेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब हरियाणा की ओर से दिल्ली पहुंच रहे किसानों को उनका समर्थन नहीं था। यह वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं लेकिन फिर भी पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया।
सुमन शर्मा, मरुआझाला। संवाद
सुमन शर्मा, मरुआझाला। संवाद
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