- कोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में दोषी ठहराया
- गंभीर अपराध मानते हुए सुनाई सजा
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो कोर्ट-2 ने आरोपी अर्जुन को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत की पीठासीन अधिकारी पूनम द्वितीय ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
अदालत के आदेश के मुताबिक घटना के बाद पीड़िता के परिजनों की ओर से 5 सितंबर 2021 को सूचना दी गई थी। आरोप था कि आरोपी एक सितंबर को पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। परिजनों ने उसकी तलाश की और बाद में पुलिस से शिकायत की गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, चिकित्सीय साक्ष्य, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जुटाए। अभियोजन की ओर से छह गवाह अदालत में पेश किए गए।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने आरोपों से इनकार किया था। बचाव पक्ष की ओर से दावा किया गया कि पीड़िता बालिग थी और दोनों के बीच पहले से जान-पहचान थी। आरोपी ने खुद को रंजिश के कारण झूठा फंसाए जाने की बात कही थी। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों में दोषी माना।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन साक्ष्य से यह साबित हुआ कि आरोपी पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ यौन अपराध किया। अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। फैसले में चिकित्सीय और अन्य साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि नाबालिग के साथ किया गया यौन अपराध गंभीर प्रकृति का है और ऐसे मामले में अपराध की गंभीरता को देखते हुए उचित दंड दिया जाना आवश्यक है। अदालत ने इसी आधार पर आरोपी को कठोर कारावास की सजा सुनाई।