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Ghaziabad News: संपत्ति कर के नाम पर खेल, मॉल से गायब 50 दुकानें

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गाजियाबाद। आवासीय संपत्ति कर की दरें बढ़ाकर आम जनता की जेब पर बोझ डाला जा रहा है। वहीं, व्यावसायिक संपत्तियों के कर निर्धारण में बड़ा खेल चल रहा है। राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) में एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसे लेकर नगर निगम में खासी चर्चा चल रही है। आरडीसी में एक मॉल की आधी से अधिक दुकानों पर कर लगाया ही नहीं गया। जबकि कई दुकानों पर आवासीय दरों से कर लगाने की बात भी सामने आ रही है।
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आरडीसी में व्यावसायिक संपत्तियों के कर निर्धारण में बरती जा रही अनियमितता के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। खुद महापौर सुनीता दयाल ने संपत्ति कर विभाग की गड़बड़ी को पकड़ा था। अब आरडीसी के ही एक मॉल में 50 से अधिक दुकानें संपत्ति कर विभाग के रिकॉर्ड से गायब होना चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार लगभग एक हजार वर्गमीटर में बने इस बहुमंजिला मॉल में 100 से अधिक दुकानें हैं लेकिन 45 से 50 दुकानों पर ही संपत्ति कर लगाया गया है।
50 से अधिक दुकानें ऐसी हैं जो संपत्ति कर के दायरे से बाहर हैं। बताया जा रहा है कि मामला संज्ञान में आने के बाद महापौर ने मौके पर जाकर संबंधित अधिकारियों को तलब कर पैमाइश कराई है। इस मामले की जांच कराने के लिए भी कहा गया है, क्योंकि फिलहाल इस मॉल से साढ़े चार से पांच लाख रुपये संपत्ति कर वसूला जा रहा है। लगभग एक हजार वर्गमीटर जमीन पर बने पूरी तरह कवर्ड इस बहुमंजिला मॉल का संपत्ति कर मूल्यांकन 40 लाख से अधिक आंका जा रहा है। ऐसे में भारी आर्थिक क्षति नगर निगम को पहुंच रही है।
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पहले भी सामने आ चुकी है गड़बड़ी
नगर निगम के संपत्ति कर विभाग के कारनामे पहले भी सामने आ चुके हैं। बीते जुलाई में महापौर ने आरडीसी में व्यावसायिक भवनों पर आवासीय दरों से संपत्ति कर वसूलने के मामले का खुलासा किया था। तीन-चार ऐसे भवनों की पहचान की गई जो 24 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़क पर स्थित हैं लेकिन इन्हें संपत्ति कर के बिल 12 मीटर तक चौड़ी सड़क के लिए तय दरों के आधार पर भेजे गए। इसके बाद एक बड़े अस्पताल के कर निर्धारण में भी गड़बड़ी का खुलासा किया। अस्पताल के बेसमेंट को निर्माणाधीन दिखाया गया, जबकि वह पूरा कवर्ड एरिया है। अस्पताल पर जितना कर निर्धारित होना चाहिए था, उतना नहीं किया गया।

50 हजार व्यावसायिक संपत्तियों का होगा सत्यापन
नगर निगम की तरफ से शहर की 50 हजार से ज्यादा व्यावसायिक संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। इनमें पांच हजार संपत्तियां ऐसी हैं जिनका वार्षिक कर मूल्यांकन एक लाख रुपये से ज्यादा है। निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि लगभग 2700 संपत्तियों का सत्यापन हो गया है। व्यावसायिक संपत्तियों की वास्तविक स्थिति के आधार पर सही कर निर्धारण के लिए सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अगले दो महीने में इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। किसी संपत्ति पर कम या ज्यादा कर लगाए जाने की जानकारी जुटाई जा रही है। पहले चरण में मॉल, कांप्लेक्स और बड़े व्यावसायिक परिसरों का सत्यापन कराया जा रहा है।

मॉल पर कम संपत्ति कर लगाए जाने का मामला संज्ञान में आया था। मौके पर जाकर पैमाइश भी कराई गई थी। संबंधित अधिकारियों ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए उनसे प्रतीत होता है कि जितना कर लगना चाहिए उतना नहीं लग रहा। अगर कहीं किसी तरह की अनियमितता है तो उसकी जांच कराने के लिए निगम अधिकारियों को कहा गया है। - सुनीता दयाल, महापौर
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मेरे पास फाइनल रिपोर्ट नहीं आई है। संपत्ति कर का अगर कम निर्धारण किया गया होगा तो नियमानुसार वसूली की जाएगी। पूरे शहर में व्यावसायिक संपत्तियों का दोबारा से सत्यापन कराया जा रहा है। जहां कर नहीं लगा या कम लगा है, ऐसी ही संपत्तियों की जांच करने के बाद वसूली की कार्रवाई की जा रही है। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त
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