माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। जिले में शराब की दुकानों के खुलने का लोग विरोध करने लगे हैं। एक तरफ जहां इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है तो वहीं लॉकडाउन के दौरान लोगों के घर में इससे हिंसा होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। लोगों का कहना है कि शराब की दुकानों के खुलने से कोरोना को रोकने की पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। क्योंकि दुकानों के बाहर लबी लाइनें लगी हैं। शराब खरीदने में लोग सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं कर रहे हैंं। समाज सेविका एवं गुलमोहर एंक्लेव आरडब्लूए की पूर्व अध्यक्षा रश्मि चौधरी ने शराब बिक्री से प्रतिबंध उठाने के सरकार के फैसले पर पुन विचार करने का अनुरोध किया है। रश्मि चौधरी के अनुसार लॉक डाउन के दौरान केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा शराब की दुकानों को खोलने का जो निर्णय लिया गया है वह अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है। जहां एक तरफ पूरे देश की जनता के सभी वर्ग लॉक डाउन का तमाम परेशानियों के बावजूद भी पालन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शराब बिक्री का सरकारों का यह निर्णय गलत है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अपने शराब बिक्री के निर्णय पर तत्काल प्रभाव से वापस ले। --- समाज सेविका नामिता भल्ला ने कहां की सरकार का यह निर्णय बिल्कुल गलत है। हम सभी के 40 दिन की मेहनत पर और बलिदान पर पानी फेर दिया गया है।सामाजिक दूरियां ताक पर रख दी गौए हैं। इससे मरीजों की संख्या फिर बढ़ेगी और घर- घर मे कोरोना फैलेगा। इससे घरेलू हिंसा भी बढ़ने लगेगी।