गाजियाबाद। संयुक्त और जिला महिला अस्पताल में पिछले दस महीने से अल्ट्रासाउंड जांच बंद पड़ी है। महिला अस्पताल में दो घंटे के लिए रेडियोलॉजिस्ट जांच करने के लिए आते हैं, लेकिन सभी गर्भवती की जांच नहीं हो पाती है। संयुक्त अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए आई डिजिटल एक्स-रे मशीन भी बंद पड़ी है। एमएमजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था तो है, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने से आठ से 10 दिन का समय दिया जाता है। एमएमजी अस्पताल में दिल की जांच के लिए जरूरी ईको और टीएमटी जांच की सुविधा भी नहीं है। दोनों मशीनें पिछले छह साल से खराब पड़ी हैं। मशीनों की मरम्मत और उन्हें बदलने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। निजी अस्पतालों और लैब में ईको हार्ट और ट्रेड मील टेस्ट (टीएमटी) जांच के लिए पांच से सात हजार रुपये मरीजों को खर्च करने पड़ते हैं। संयुक्त अस्पताल में दस महीने से अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। तीन महीने पहले मुरादनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. प्रदीप रेडियोलॉजिस्ट मेरठ में छह महीने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी तैनाती संयुक्त अस्पताल में हो जाएगी, लेकिन अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही है। अस्पताल में लगी डिजिटल एक्स-रे मशीन भी छह महीने से खराब पड़ी है। मशीन की मरम्मत के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है,लेकिन मरम्मत नहीं हो रही है। एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन जल्द शुरू होगी। इसके अलावा टीएमटी और ईको जांच कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। वहीं संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि अल्ट्रासाउंड जांच और डिजिटल मशीन की मरम्मत कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है, जल्द ही जांच शुरू हो जाएगी।