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Ghaziabad News: आवारा कुत्तों की समस्या का उठाया मुद्दा, कोर्ट जाएंगे निवासी

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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी में शनिवार शाम फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन एओए पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में राजनगर एक्सटेंशन की प्रमुख पांच समस्याओं पर चर्चा की गई। पांच एजेंडों में प्रमुख आवारा कुत्तों की समस्या रही। एक्सटेंशन निवासी अधिवक्ता अंकित गुप्ता ने कहा कि यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। नगर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस समस्या के निराकरण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का निर्णय लिया गया। रविवार को 61 सोसायटी के एओए की बैठक बुलाने पर सहमति बनी। दूसरा एजेंडा राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में गंगा जल परियोजना से जलापूर्ति की रही। बैठक में फेडरेशन के अध्यक्ष सचिन त्यागी ने कहा कि लगातार गिर गिर रहे भू-जल स्तर को बचाने के लिए समूचे क्षेत्र में गंगाजल की आपूर्ति होनी जरूरी है। 2013 से राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में निवास कर रहे हैं करीब एक लाख लोग ग्राउंड वाटर पर निर्भर हैं। पिछले 10 सालों में 30 से 40 फुट तक जलस्तर गिर चुका है। इस विषय पर शासन-प्रशासन को पत्र लिखने के बाद भी अभी तक गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो सकी है। निर्णय लिया गया कि गंगाजल लाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसे आंदोलन का रूप दिया जाएगा। तीसरा एजेंडा के डब्लू सृष्टि के ब्लॉक-ए में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां का रहा। केडब्ल्यू सृष्टि से बैठक में मौजूद नीतू सिंह ने समस्या रखी कि उनकी सोसाइटी में स्थित ब्लॉक-ए में लगभग 25-30 फ्लैटों में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, कुछ नकारात्मक सोच के निवासियों के कारण आज तक सोसाइटी में एओए की स्थापना नहीं हो पाई है। उन्होंने फेडरेशन से साथ देने की मांग की। बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने प्रशासन से शिकायत कर व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया। चौथा मुद्दा राजनगर एक्सटेंशन में अतिक्रमण का रहा। वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के प्रमुख गोपाल सिंह ने कहा कि एक्सटेंशन के हर चौक चौराहे पर अतिक्रमण से लोग परेशान हैं। सुबह-शाम को यहां से निकलना मुश्किल होता है। इसके लिए पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा। कार्यकारिणी सदस्यों ने प्रस्ताव को एकमत से पारित किया, संस्था की ओर से सचिव (विधिक) गणेश्वर लहन को इस समस्या के निराकरण के लिए कार्यवाही का उत्तरदायित्व सौंपा पांचवां मुद्दा निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविरों में योगदान देने वाले चिकित्सकों को निशुल्क सदस्यता का रहा।
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