शक्तिखंड में आर्ची अपहरण मामले के बाद टीएचए के अभिभावकों की नींद उड़ गई है। हॉट सिटी के अभिभावकों ने अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए मोबाइल एप और गैजेट का सहारा लिया है। एप से कनेक्ट होने पर बच्चों की लोकेशन उन्हें आसानी से मिल जाती है। ऐप और गैजेट ने अभिभावकों की टेंशन थोड़ी कम कर दिया है।
टीएचए में युवतियों और बच्चियों के साथ छेड़खानी और बच्चों के अपहरण के मामले सामने आ रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि सुबह घर से निकलने वाले बच्चे या युवतियां शाम को सुरक्षित घर लौटेंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
ऐसे में मोबाइल ऐप, जीपीएस व अन्य तरह के गैजेट का सहारा लेकर बच्चों और युवतियों की सुरक्षा की जा सकती है। ऑफिस या घर बैठे ही इनकी पल-पल की लोकेशन मिलती रहेगी।
आईटी से जुड़े बीके पांडेय ने बताया कि गूगल प्ले स्टोर पर मिलने वाला फैमिली लोकेटर जीपीएस ट्रैकर एप का इन दिनों लोग काफी इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एप हर वक्त आपको अपने परिजनों और दोस्तों से जोड़े रखता है।
फोन कांटेक्ट में मौजूद सभी लोग आपकी लोकेशन नहीं देख सकते हैं। इस एप को डाउनलोड करने के बाद एक ग्रुप बनाना होता है जिसे सर्कल नाम दिया गया है। एक एप में जितने चाहें उतने सर्कल बनाए जा सकते हैं। सर्कल में मौजूद हर एक सदस्य एक दूसरे की लोकेशन देख सकता है। सर्कल में यूजर को शामिल करने की कोई सीमा नहीं है।
विदेशों से मंगाया जा रहा गैजेट
अहिंसाखंड-2 स्थित एग्जिॉटिका एलीगेंस सोसायटी निवासी केके सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे के लिए सिंगापुर से एक घड़ी मंगाई है। इसमें एक सिम लगी हुई है, यह सिम उनकी मोबाइल एप से कनेक्ट है।
इसके माध्यम से वे बच्चे की पल-पल की लोकेशन जान सकते हैं। साथ ही घड़ी में वॉइस नोट है और दो बटन दिए गए हैं। बच्चा किसी परेशानी में होता है तो एक नंबर बटन दबाते ही कॉल आएगी और दूसरी बटन दबा कर वह अपनी मम्मी से बात कर सकता है।