विधानसभा चुनाव का सुरूर पूरे शबाब पर है। सारे राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण लगा रहे हैं, लेकिन अगर सारे वोटर्स जागरूक हो जाएं तो तमाम राजनीतिक पार्टियों के समीकरण बदल जाएंगे।
दरअसल, हर चुनाव में गाजियाबाद के आठ से 10 लाख वोटर्स मतदान नहीं करते और ‘पप्पू’ बने रहते हैं। आपसे अपील है कि इस बार ऐसा न करें और चुनाव में मतदान कर सरकार चुनने में भागीदारी निभाएं।
विधानसभा चुनाव 2007 में तीन विधानसभा सीटों (गाजियाबाद, मुरादनगर और मोदीनगर) पर 14 लाख 63 हजार 273 वोटर्स थे। इनमें से महज पांच लाख 82 हजार 233 वोटर्स ने ही मतदान किया था, यानी आठ लाख 81 हजार 40 वोटर्स ने वोट नहीं डाले।
इसी तरह विधानसभा चुनाव 2012 में पांचों विधानसभा सीटों (लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद और मोदीनगर) पर 20 लाख 191 वोटर्स थे, जिनमें से 11 लाख 24 हजार 90 वोटर्स ने ही मतदान किया था।
बाकी आठ लाख 76 हजार 101 वोटर्स ने वोट नहीं डाले थे। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर इन दोनों विधानसभा चुनावों में ये वोट भी डाले गए होते तो राजनीतिक समीकरण क्या हो सकते थे।
यहां लोकसभा चुनावों में भी यही हालात रहे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद में करीब 23 लाख 55 हजार मतदाता थे। इनमें से तकरीबन साढ़े 13 लाख मतदाताओं ने ही अपने मत का प्रयोग किया था।
बाकी करीब 10 लाख वोटर्स ने वोट न डालकर खुद को ‘पप्पू’ की जमात में शामिल कर लिया था। पिछले 10 सालों में हॉट सिटी के नाम से मशहूर हुए गाजियाबाद में वोट तो बढ़े, मगर मतदान ज्यादा नहीं बढ़ता।
इस बार विधानसभा चुनाव में 25 लाख 92 हजार 459 मतदाता हैं। उम्मीद की जा रही है कि मतदान 70 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा। इसके लिए पुलिस और प्रशासन जागरूकता अभियान चला रहा है।
रैलियां निकाली जा रही हैं और सिनेमा हॉल में इंटरवल के दौरान विज्ञापन के माध्यम से वोट डालने की अपील की जा रही है। देखते हैं ये मुहिम कितना रंग लाती है।
विधानसभा चुनाव का हाल
चुनाव वर्ष मतदान प्रतिशत
2012 56.07
2007 42.20
तीन लोकसभा चुनाव का हाल
चुनाव वर्ष मतदान प्रतिशत
2014 59.08
2009 46.04
2004 44.26