माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। नवंबर और दिसंबर के बीच प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं। लेकिन पंचायत चुनावों के तय समय में होने पर संशय के बादल मंड़रा रहे हैं। कारण अभी तक पंचायत चुनावों की तैयारियां विभागीय स्तर पर शुरू नहीं हो पाई है। इसका कारण कोरोना संकट माना जा रहा है। जिसके चलते पंचायत चुनाव की तैयारियों में अड़ंगा लगा हुआ है। अगर पंचायत चुनाव तय समय में नहीं हो पाए तो ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए प्रशासक के तौर पर ग्राम पंचायत में एडीओ पंचायत काम देखेंगे। वहीं क्षेत्र पंचायत में एसडीएम और जिला पंचायत में डीएम को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभी चुनाव के टलने के और प्रशासनिक अधिकाररियों के नियुक्त होने की आधिकारिक गाइडलाइन नहीं आयी है। जिला स्तर पर भी प्रशासन अपने संसाधनों के साथ कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने में जुटा हुआ है। ऐसे में इस महामारी के समय में चुनाव टलने की प्रबल संभावना बनी हुई है। अगर ऐसा होता है तो चुनाव आगामी 6 महीने के लिए टल सकते हैं। आगामी 25 दिसंबर को प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। यानी यूपी पंचायतों का कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे हो जाएंगे। सूत्रों के अनुसार अगर पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं होते हैं तो ऐसे में प्रशासन की नियुक्ति की जा सकेगी। हालांकि पंचायती राज विभाग के पास पंचायत चुनाव टलने या फिर प्रशासक नियुक्त करने का कोई शासनादेश आदि नहीं आया है। चुनावों की गतिविधियां करीब छह महीने पहले शुरू कर दी जाती हैं। लेकिन इस बार न तो सरकार के स्तर पर और न ही पंचायती राज विभाग में इस पर कोई बात हो रही है। इससे जाहिर होता है कि अभी पंचायत चुनाव को अगले छह महीने के लिए टाला जा सकता है और पंचायत स्तर प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त होंगे। इस मामले में प्रधानों का कहना है कि ऐसा हुआ तो गावों के विकास कार्य रुक जाएंगे और काफी समस्या भी आएगी। इसके बदले प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए या फिर तय समय पर चुनाव कराए जाएं। क़ोट्स प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त हुए तो गांवों के विकास कार्य रुक जाएंगे। अधिकारियों के पास पहले से ही अधिक जिम्मेदारी होती है ऐसे में वह गांवों की तरफ ध्यान नहीं दे पाएंगे। शाहिद चौधरी, मछेरी ग्राम प्रधान ------ गांवों की हर छोटी बड़ी समस्या ग्राम प्रधान को पता होती है और ग्रामीण भी हर समस्या को लेकर हमारे पास ही आते हैं। अधिकारी तो कभी कभार गांवों में आते हैं । इससे अच्छा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए। अर्निमा त्यागी, प्रधान बसन्त पुर सैथली ----–-- या तो चुनाव समय पर कराए जाएं या फिर प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। हम इसका विरोध करेंगे। महेश गुज्जर, प्रधान संगठन के अध्यक्ष, लोनी , मेवला भट्टी, -------- चुनावों को टलने की और प्रशासनिक अधिकारी के नियुक्त होने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। हैं वैसे चुनाव को लेकर अभी काफी काम बचा है। अनिल त्रिपाठी, जिला पंचायत राज अधिकारी,