गाजियाबाद। शिकायतों की लंबी फेहरिस्त, बैठकों और दावों के बावजूद शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक थम नहीं रहा है। राजनगर एक्सटेंशन की राजनगर रेजीडेंसी सोसायटी में मंगलवार को इसका खामियाजा साढ़े तीन साल की बच्ची को भुगतना पड़ा। बेसमेंट में कुत्तों के झुंड ने बच्ची पर हमला कर दिया। उसके कान पर चार टांके आए हैं। घटना के बाद से बच्ची और परिवार डरा हुआ है।
बच्ची के पिता शुभम गुप्ता ने बताया कि तेज बारिश के कारण उनकी पत्नी नीलम एच-ब्लॉक स्थित स्कूल से साढ़े तीन साल की बेटी व दो साल के बेटे को लेकर ई-ब्लॉक बेसमेंट के रास्ते घर जा रही थीं। इसी दौरान वहां मौजूद चार लावारिस कुत्तों ने अचानक बच्चों पर हमला कर दिया।उन्होंने बताया कि पत्नी छोटे बेटे को बचाने में लगी थीं। इस बीच कुत्तों ने बेटी अपूर्वा का स्कूल बैग खींच लिया। इससे बच्ची जमीन पर गिर गई, जिसके बाद कुत्तों ने उसके कान पर काटकर लहूलुहान कर दिया। कुत्तों के हमले में उसके हाथ पर भी चोट आई है।
बच्ची की चीख सुनकर कार पार्क कर रहे एक दंपती ने वहां पहुंचकर कुत्तों को भगाया। इसके बाद गार्ड, मेंटेनेंस टीम और अन्य निवासी मौके पर पहुंचे। बच्ची को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए और कान पर चार टांके लगाए गए। इलाज के बाद शाम को उसे छुट्टी दे दी गई।
वहीं, नगर निगम के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अनुज सिंह का कहना है कि लावारिस कुत्ते को पकड़ने के लिए टीम भेजी गई है।
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40 कुत्ते, 50 शिकायतें और फिर भी वही हाल
इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम और जिम्मेदार एजेंसियों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोसायटी के मेंटेनेंस इंचार्ज हर्ष कुमार ने बताया कि परिसर में करीब 40 लावारिस कुत्ते हैं। ये कुत्ते पहले भी कई लोगों पर हमला कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम में करीब 50 बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को दोबारा परिसर में छोड़ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कई एनजीओ से भी मदद मांगी गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। घटना के बाद फिर शिकायत कर आक्रामक कुत्तों को पकड़कर हटाने की मांग की गई है। स्थानीय निवासी एमके अग्रवाल ने बताया कि सोसायटी में 975 फ्लैट हैं और करीब साढ़े तीन हजार लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि अब लोगों को बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
दावों के बीच डर का माहौल
शहर में लावारिस कुत्तों को लेकर समय-समय पर अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सोसायटियों और कॉलोनियों में लोगों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। राजनगर रेजीडेंसी की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।