जनपद में अब सरकारी स्तर पर कुत्ते काटे का इंजेक्शन नहीं लग पाएगा। सभी सरकारी अस्पतालों और सीचएसी -पीएचसी में दो महीने से रैबीज के इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। अब आलम यह है कि पूरे प्रदेश में अधिकतर जगहों पर रैबीज के इंजेक्शन खत्म हैं। सीएमओ का कहना है कि प्रदेश भर में एंटी रैबीज के इंजेक्शन की भारी कमी है।
इसका कारण दवा कंपनी के कांट्रेक्ट का नवीनीकरण नहीं हो पाना बताया जा रहा है।कुत्ते के काटने के बाद अब प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा रहेगा। पिछले दो महीने से एमएमजी अस्पताल में रैबीज का इंजेक्शन खत्म है लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं आ पाई है। इसके अलावा सभी सीएचसी-पीएचसी में भी रैबीज के इंजेक्शन खत्म हो गए हैं।
संयुक्त जिला अस्पताल में भी अब कुछ दिनों का स्टॉक बचा है। अन्य स्थानों पर इंजेक्शन खत्म होने के बाद संयुक्त जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। यहां पहले जहां सौ से सवा सौ तक मरीज आते थे, अब दो सौ से ढाई सौ तक मरीज इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं।
एमएमजी के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी ने बताया कि शासन को लगातार पत्र लिखा जा रहा है लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं आ पाई है। आश्वासन मिला है कि कुछ दिनों में दवा आने वाली है।
वहीं संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि अस्पताल में अब लिमिटेड स्टॉक बचा है अब अन्य अस्पतालों के मरीज भी यहां आ रहे हैं, जल्द ही यहां भी स्टॉक खत्म होने वाला है। डिमांड भेजी गई है लेकिन कंपनी की तरफ से दवा की सप्लाई नहीं हो रही है।
प्राइवेट अस्पताल में होगा ढाई से पांच हजार तक खर्चाबाजार में रैबीज के इंजेक्शन का रेट 320-250 रुपये है। रैबीज के करीब चार इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। ऐसे में प्राइवेट डाक्टर की फीस और दवाओं का मिलाकर ढाई से पांच हजार तक का खर्चा मरीजों को उठाना पड़ेगा।