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Ghaziabad News: बोर्ड में आए 110 दिव्यांगों में से 55 का ही बना प्रमाण पत्र

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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल के एनसीडी विंग में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने आए 55 दिव्यांगों को निराश होना पड़ा, क्योंकि उन लोगों को बिना प्रमाण पत्र बनवाए ही वापस जाना पड़ा। बोर्ड में मौजूद चिकित्सकों का कहना था कि सिर्फ उन्हीं दिव्यांगों को वापस किया गया है, जिनकी जांच कराने की जरूरत थी या दस्तावेज में कमी थी। उन्हें जांच और कागज की कमी पूरा कराने के बाद सोमवार को बुलाया गया है।
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सोमवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 115 दिव्यांग पहुंचे थे। कई दिव्यांग ऐसे थे जो किराये के वाहनों में व्हील चेयर से आए थे। लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बनने से आवेदक मायूस होकर वापस लौट गए। बोर्ड स्थल के पास पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से प्रमाण पत्र बनवाने आए दिव्यांगों को परेशानी हो रही है।

नहीं बना प्रमाण पत्र 22 को बुलाया
नंदग्राम निवासी वंश त्यागी को उनके पड़ोसी किराए के वाहन और व्हील चेयर से लेकर आए थे। उनका बचपन में दिव्यांग प्रमाण पत्र बन गया था। 18 वर्ष की उम्र पूरा होने पर मानसिक जांच भी की जानी थी, लेकिन भीड़ अधिक होने से वापस भेज दिया गया। 22 फरवरी को जांच की तारीख मिली है।
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शौचालय की नहीं है व्यवस्था
संजय नगर से आए धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जिस इमारत में दिव्यांग बोर्ड की व्यवस्था की गई है, वहां शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस कारण दिव्यांगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पेयजल की भी नहीं होती व्यवस्था
सिहानी गांव से आए दिव्यांग विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि जिस जगह पर बोर्ड लगा है। वहां पर 20 लीटर का एक बोतल पानी रखा था, 11 बजे पानी खत्म हो गया था। इसके बाद दिव्यांग बाहर से पानी खरीदकर ला रहे थे, एमएमजी अस्पताल परिसर से पानी बोतल में भरकर ला रहे थे।

पांच डॉक्टर हैं बोर्ड में शामिल
दिव्यांग बोर्ड में एमएमजी अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डॉ. शेखर यादव, फिजीशियन डॉ. आलोक रंजन, नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र और मानसिक विशेषज्ञ डॉ. साकेत नाथ तिवारी बोर्ड में शामिल हैं। जबकि काउंसिलिंग क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव करती हैं।
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कराई जाएगी शौचालय की व्यवस्था
दिव्यांग बोर्ड के नोडल डॉ. चरन सिंह ने बताया कि पेयजल की व्यवस्था की जाती है। शौचालय के लिए सीएमओ से वार्ता कर जल्द ही बनवाया जाएगा।

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