कृषि कानूनों के खिलाफ यूपी गेट पर किसानों का कारवां फिर से बढ़ता जा रहा है। भाकियू ने गुरुवार को बुलंदशहर से करीब 400 ट्रैक्टरों पर करीब एक हजार किसानों के पहुंचने का दावा किया है। वहीं, 26 जून को लखनऊ में राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के लिए भी रणनीति बनाई जा रही है। बुधवार को यूपी गेट पर किसानों ने उत्तराखंड में दो किसानों की मौत के बाद उनके परिजनों को 25-25 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा देने की मांग की।
भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि बुलंदशहर से किसानों का हुजूम यूपी गेट आंदोलनस्थल तक पहुंचने के लिए रवाना हो चुका है। गुरुवार दोपहर में किसान आंदोलन स्थल में पहुंचकर सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे। वहीं, किसानों को किसी प्रकार की कमी महसूस ना हो। इसके लिए अब गांव के उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने जिम्मा उठा लिया है। सभी अपने गांवों से सामान इकट्ठा कर आंदोलन में पहुंच रहे हैं। मुजफ्फरनगर के गांवों से किसानों ने दूध की जिम्मेदारी ली है। रोजाना ट्रैक्टर-ट्रॉली में 10 से 12 क्विंटल दूध यूपी गेट पर पहुंच रहा है।
गाजीपुर किसान आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने बताया कि किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक में उत्तराखंड में ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर क्षेत्र में दो किसानों की मौत का मामला उठा। इसमें किसानों ने दो दबंगों पर हत्या करने का आरोप लगाया। किसानों ने आरोपियों को कड़ी सजा देने व पीड़ित परिवारों को 25- 25 लाख रुपये आर्थिक सहायता की मांग की।
वहीं, सितारगंज के सुखचैन सिंह के आकस्मिक निधन पर यूपी गेट पर किसानों ने दुख व्यक्त किया। किसानों ने उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के मद्देनजर किसान आंदोलन को और अधिक सक्रिय बनाने की रणनीति बनाई। इस बीच भाजपा को वोट की चोट पहुंचाने का प्लान तैयार किया गया। बैठक में डीपी सिंह, राजवीर सिंह जादौन, बलजिंदर सिंह मान, गुरअवनीत सिंह मांगट, धर्मपाल सिंह, आशीष मित्तल, सुखराज सिंह, गुरमेल सिंह, मनजीत सिंह आदि मौजूद रहे।