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Ghaziabad News: किसानों के सब्र को कमजोरी न समझें अधिकारी कैलाश नागर

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साहिबाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से जमीन वापस करने की मांग को लेकर कनावनी गांव के किसानों का दो माह 11 दिन से निरंतर धरना चल रहा है। शुक्रवार को किसानों ने धरने स्थल पर एक स्पेशल बैठक बुलाई और आगामी आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा की। किसानों ने कहा कि यदि उनको मार्केट दर से मुआवजा नहीं दिया जाता है तो वह अपनी जमीन नहीं देंगे और अने नाम ही कराकर रहेंगे।
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किसान मथन सिंह नागर ने कहा कि नोएडा के एक गांव के सर्किल रेट के अनुसार उनको 4500 रुपये प्रति मीटर से मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि कनावनी का सर्किल रेट 55 हजार रुपये मीटर है। मगर अधिकारी उनको यह मुआवजा नहीं देना चाहते हैं। इसी के विरोध में किसान धरना दे रहे हैं। किसानों की नाराजगी समय के साथ बढ़ती जा रही है। किसान चतर सिंह नागर का कहना है कि उनके शांतिपूर्ण धरने को जीडीए व जिला प्रशासन अनदेखी कर रहा है, इसका बड़ा खामियाजा उन्हें भुगतना होगा। समस्याओं का समाधान न किए जाने से किसानों में भारी आक्रोश है। धरना स्थल पर किसान लखीराम शर्मा ने कहा कि वे 71 दिनों से अपने हक और जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। प्राधिकरण किसानों से बातचीत कर समाधान निकालने के बजाय अपनी मनमानी पर अड़ा हुआ है। किसान जगत सिंह नागर ने कहा कि जब तक उनकी जमीनों के संबंध में न्याय नहीं मिलता तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब किसान जमीन देने को तैयार नहीं है और खसरा-खतौनी में किसानों के नाम बहाल किए जाएं। किसान नेता कैलाश नागर ने प्रशासन को चेतावनी दी कि उनके धैर्य को कमजोरी समझने की भूल न की जाए। प्रशासन की चुप्पी और प्राधिकरण द्वारा वार्ता से दूरी बनाए रखने से उनका आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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