ढेर सारा स्कूल का होमवर्क, समर कैंप में हिस्सेदारी व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी ने बच्चों की गर्मी की छुट्टियों पर ग्रहण-सा लगा दिया है। ऐसे में पूरी गर्मी की छुट्टी भर वे इसी में उलझे रहते हैं। जबकि डेढ़ दशक पहले तक गर्मी की छुट्टियां बच्चों के लिए सैर-सपाटे का न्योता लेकर आती रही हैं।
इन दिनों ज्यादातर बच्चे नाना-नानी और दादा-दादी के पास जाकर अथवा मम्मी-पापा के साथ कहीं घूमने-फिरने का कार्यक्रम बनाकर छुट्टी का लुत्फ उठाते थे। अब यह सब बीते दिनों की बात हो गई है।बच्चों की गर्मी छुट्टियां कभी नाना-नानी और दादा-दादी के नाम हुआ करती थी।
अब नानी साल भर इंतजार ही करती रहती हैं और बच्चे आगे के कोर्स की तैयारी में उन तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। पहुंचते भी हैं तो महज दो-चार रोज के लिए। अशोक नगर निवासी ज्योति त्रिखा बताती हैं कि अब तो बच्चों को छुट्टी मिलती ही नहीं। कभी एक्सट्रा क्लास के नाम पर स्कूल जाते हैं तो कभी समर कैंप।
स्कूल का ढेर सारा होमवर्क भी खेलने-कूदने का समय छीन लेता है। ज्योति त्रिखा के मुताबिक उनकी बेटी गुड़गांव में रहती हैं, हर साल उनके और बच्चों के आने का इंतजार रहता है। चार दिन भी आकर रह लेते हैं तो मन को तसल्ली मिल जाती है। पहले बच्चे गर्मी की छुट्टी उन्हीं के पास बिताते थे।
अब सब बीते दिनों की बात होती जा रही।गीता बत्रा कहती हैं कि उनके बेटा-बहू उनके साथ ही रहते हैं, ऐसे में पोते-पोतियों का पूरा प्यार उन्हें मिलता है, जबकि बेटी के आने का हर साल इंतजार रहता है। बच्चों को भी आने की फुर्सत नहीं मिलती। हम भी समझते हैं समय बदल गया है, हमारा टाइम कुछ और था।
अब बच्चों की लाइफ में कंप्टीशन बहुत है, ऐसे में उनके करियर के लिए सभी चीजें जरूरी है। वहीं, अशोक नगर मोहल्ले की 12 वीं कक्षा की छात्रा तनिशा का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बोझ अब सैर-सपाटे की इजाजत नहीं देता है। इसी तरह एक अन्य छात्रा की मानें तो छुट्टियां कब खत्म हो जाती हैं, पता ही नहीं चलता है।