माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में निर्मित होने वाले शौचालय की धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में न जाकर सीधे लाभार्थी के खाते में भेजा जाएगा। शौचालय निर्माण के लिए ग्राम प्रधान व सचिव लाभार्थियों के चयन संबंधी स्वीकृति पत्र विभाग को देंगे और निर्माण की मानिंटरिंग करेंगे। स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित होने वाले शौचालयों का पैसा अब तक ग्राम पंचायतों को दिया जाता था। ग्राम पंचायत सचिव व प्रधान लाभार्थी का चयन भी करते थे और निर्माण कार्य भी स्वयं कराते थे। विभाग ने इस परंपरा को बदलते हुए शौचालय निर्माण की धनराशि अब सीधे लाभार्थी के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। विभाग ने उक्त परिवर्तन लाभार्थियों में शौचालय प्रयोग के प्रति आकर्षण बढ़ाने को लेकर किया है। विभाग का मानना है कि यदि लाभार्थी स्वयं निर्माण कराएगा तो उसकी गुणवत्ता भी ठीक होगी और लोग उसका प्रयोग करेंगे। विभाग का मानना यह भी है कि लाभार्थी यदि उसमें अपना धन भी लगाना चाहे तो इच्छानुसार लगा सकता है। यदि धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में जाने की बजाय लाभार्थी के खाते में जाएगी तो निर्माण कार्य भी तेज होंगे और स्वच्छ भारत मिशन का मकसद भी पूरा होगा। बता दे कि पंचायतों के माध्यम से जाने वाले पैसे में घोटाले को लेकर तरह—तरह के आरोप लगते रहे हैं। स्वच्छता मिशन के तहत बन रहे शौचालयों में अनियमितता की शिकायतों पर पंचायती राज विभाग सख्त हो गया है। ग्राम पंचायत के खाते में शौचालय निर्माण का पैसा न जाकर सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचेगा। पहली किश्त मिलने के बाद लाभार्थी को दूसरी किश्त के लिए शौचालय निर्माण की फोटो पंचायती राज विभाग को देनी होगी। पंचायती राज विभाग द्वारा लाभार्थी द्वारा दिये गये फोटो का सत्यापन कराने के बाद ही दूसरी किश्त दी जाएगी। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि शासन की तरफ यह आदेश आ गया है कि पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में जायेगा परन्तु जिले में अभी शौचालय निर्माण का कोई लक्ष्य नहीं है। जब नया लक्ष्य आएगा तब इसको लागू किया जाएगा।