ब्लैक लिस्टेड फर्म से तोहफे में कार लेने के आरोप के बाद अब नगर निगम चीफ इंजीनियर आरके मित्तल एक ठेकेदार के निशाने पर आ गए हैं। एके कांट्रेक्टर एंड बिल्डर्स फर्म के संचालक अशोक शर्मा ने चीफ इंजीनियर पर फर्जी एजेंसी बनाकर भुगतान कराने और चहेती फर्मों को टेंडर देने का आरोप लगाया है।
उन्होंने हाल ही में कामर्शियल कांप्लेक्स और ऑडिटोरियम के टेंडर निकालने में भी धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने इसकी शिकायत मंडलायुक्त, नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी है।ठेकेदार अशोक शर्मा का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर चीफ इंजीनियर ने अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिए।
मेरठ से आई चार फर्मों को अब तक करीब 8 से 10 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश काम हुआ ही नहीं है। इनके अलावा अवस्थापना फंड और 14वें वित्त आयोग के फंड से नाले निर्माण में भी बड़ा गोलमाल किया जा रहा है। आरोप है कि चार फर्मों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है।
पुरानी दीवारों पर नाले बना दिए गए हैं। आरोप है कि ई-टेंडरिंग में भी जो ठेकेदार ऑनलाइन निविदा डालते हैं, उनकी निविदाएं चीफ इंजीनियर पहले ही देख लेते हैं। निविदाएं डालने वाले ठेकेदारों को फर्म ब्लैक लिस्ट करने की धमकी देकर निविदा वापस दिलाई जाती है। इसके बाद अपनी चहेती फर्मों को काम बांटे जाते हैं।
शिकायतकर्ता ठेकेदार अशोक शर्मा का कहना है कि हाल ही में चीफ इंजीनियर ने रमतेराम रोड कामर्शियल कांप्लेक्स और ऑडिटोरियम के बाकी बचे कार्यों के टेंडर जारी किए हैं। इनमें भी धांधली की जा रही है। उनका कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई न हुई तो वह खुद लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेंगे और निगम में चल रहे खेल की हकीकत बताएंगे।