नोटबंदी को एक माह से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हो रही। अधिकांश बैंकों की करेंसी चेस्ट दूसरे शहरों में होने से बैंकों के पास करेंसी कई-कई दिनों में आ रही है। ऐसे में लोगों को कैश नहीं मिल पा रहा। बृहस्पतिवार को भी बैंकों के बाहर लोगों की लाइनें लगी रहीं।
आरबीआई कानपुर से पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं पहुंच पा रही है। सबसे बुरी स्थिति उन बैंकों की है, जिनका करेंसी चेस्ट दूसरे शहरों में है। इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईडीबीआई, एक्सिस बैंक, आंध्रा बैंक, युनाइटेड बैंक आदि का करेंसी चेस्ट शहर में नहीं हैं।
करेंसी चेस्ट से ही बैंक शाखाओं में कैश का वितरण किया जाता है। बाहर से आने वाला कैश हमेशा कम ही रहता है। जिस जनपद में करेंसी चेस्ट होता है, उसी जनपद की शाखाओं में ज्यादा कैश मिल पाता है। यूनियन बैंक में बीते मंगलवार को 12 दिन बाद लोगों को कैश दिया गया। यही हाल बैंक ऑफ इंडिया का भी है।
एआईबीए ने दी हड़ताल पर जाने की चेतावनी
बैंकाें में पर्याप्त कैश नहीं मिलने पर एआईबीए ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (एआईबीए) के जनरल सेक्रेटरी सीएच वैंकेटचलम के मुताबिक एसोसिएशन ने आरबीआई को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि नोटबंदी के बाद से लोगों के पास नकदी की कमी है।
इसलिए जगह-जगह पब्लिक द्वारा बैंक कर्मचारियों से मारपीट व जाम लगाने की घटनाएं हो रहीं हैं। आरबीआई इसे रोकने में ठोस कदम उठाए, नहीं तो बैंक कर्मचारी व अधिकारी हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके लिए एसोसिएशन 14 दिन पूर्व नोटिस जारी करेगा।
करंट एकाउंट में जमा नहीं हो रहे पुराने नोट
करंट एकाउंट में अब पुराने 500 व 1000 के नोट जमा नहीं हो रहे हैं। ये नोट सिर्फ सेविंग एकाउंट में ही जमा किए जा रहे हैं। अधिकतर बैंकों में इन नोटों को जमा करने की स्लिप भी अलग से छपवाई गई है। स्लिप में नोटों का पूरा विवरण देना होता है।
बैंक खुले फिर लगीं लाइनें
बृहस्पतिवार को बैंक खुलने से पहले ही लोगों की लाइन लग गई। सुबह 10 बजे बैंक खुलने के बाद लोगों ने चेक या स्लिप से रुपये निकाले। कैश की कमी के कारण लोगों को कम रुपये दिए जा रहे हैं।
जैसे इलाहाबाद बैंक में पांच हजार सेविंग और 10 हजार करंट एकाउंट खाताधारक को दिया गया। एसबीआई में कैश नहीं आया। जो पहले का कैश था वही बांटा गया। उधर, अशोक नगर में ओरियंटल बैंक में कैश न मिलने पर लोगों ने हंगामा किया।
कैसे चले परिवार जब मिल रहे केवल चार हजार
नोटबंदी के बाद सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने भी अपने खर्च में कटौती कर दी है। वेतन अकाउंट में होने बावजूद पैसा न निकाल पाने की परेशानी से डॉक्टर व नर्स भी जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. जेके त्यागी न बताया कि हर रोज स्टाफ पैसे न मिलने की ही शिकायत करता है।
इस पर कई बार बैंक मैनेजर से बात की पर वेतन पूरा नहीं मिल पाया। बैंक द्वारा सरकारी अस्पताल के स्टाफ, डॉक्टर व नर्स को चार-चार हजार रुपये दिए जा रहे हैं। डा. एके सिंह ने बताया कि अब इतना कम एमाउंट मिलने से परेशानी बढ़ गई है।
पावर कारपोरेशन कैश काउंटरों पर लगी लंबी कतारें
नोटबंदी के बाद जरूरी सेवाओं में 500 रुपए की पुरानी करेंसी चलने की समय सीमा बृहस्पतिवार को खत्म हो गई। अंतिम दिन पावर कारपोरेशन के 121 कैश काउंटरों पर बिजली बिल जमा कराने वालों की भीड़ रही।
अर्से से लंबित पड़े बिजली बकाएदारों ने भी मौके का फायदा उठाकर बिल जमा कराया। बिल जमा होने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। पावर कारपोरेशन के एसई एसबी यादव ने बताया कि कैश काउंटरों पर पुरानी करेंसी लिए जाने की समयसीमा बृहस्पतिवार को खत्म हो गई। इस संबंध में कोई नई गाइडलाइन फिलहाल नहीं आई है।