फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लाइनपार का हाल... न गंगाजल न मिला अस्पताल

Sat, 04 Feb 2017 12:50 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
विज्ञापन
चुनाव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
शहर विधानसभा क्षेत्र का हाल ठीक वैसा ही है, जैसे किसी इंसान को तीन ढकने को तो मलमल के कपड़े दे दिए गए हो, लेकिन पेट खाली हो। यहां पुल बना दिए गए, आलीशान इमारतें खड़ी कर दी गई, लेकिन पानी, शिक्षा, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं।
विज्ञापन


दलों की सरकार बदली, गाजियाबाद में विधायक  बदले, लेकिन न समस्याएं बदली और न ही आश्वासनों का रूप बदला। जिस जनता ने नेताओं को विधायक बनाकर शोहरत और रुतबा दिया, विधायकों ने उसी जनता की उपेक्षा की। अब एक बार फिर राजनीतिक दलों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं और उम्मीदों की फसल बो रहे हैं।

गाजियाबाद विधानसभा में लाइनपार क्षेत्र हमेशा से सबसे ज्यादा उपेक्षित रहा है। प्रताप विहार सेक्टर-11 निवासी एचएस शर्मा ने बताया कि पांच लाख से ज्यादा की आबादी वाले इस क्षेत्र में गंगाजल के दो-दो प्लांट लगे हैं।
विज्ञापन


यह प्लांट नोएडा, इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली समेत पॉश कालोनियों के लोगों की प्यास तो बुझा रहे हैं, लेकिन विजयनगर, प्रताप विहार और लाइनपार की कालोनियों को गंगाजल नहीं मिल रहा। लाइनपार क्षेत्र में 30 फीसदी इलाका ऐसा है जहां नगर निगम की ओर से पानी के लिए पाइप लाइन तक नहीं डाली गई है।

पानी की जरूरत यहां हैंडपंप से पूरी होती है। विजयनगर सेक्टर-9 निवासी ईश्वर सिंह का कहना है कि इस क्षेत्र में सरकारी डिग्री कालेज तक नहीं है। लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए 8 से 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

वहीं नोएडा की एक एक्सपोर्ट कंपनी के कर्मचारी नरेश कुमार का कहना है कि लाइनपार क्षेत्र में सरकारी अस्पताल तक नहीं है। इलाज के लिए भी लोगों को करीब 8 से 10 किलोमीटर दूर जीटी रोड स्थित सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है।

वर्ष 2012 में प्रत्याशियों ने इन्हीं तीन प्रमुख मुद्दों पर चुनाव लड़ा। गंगाजल आपूर्ति, सरकारी अस्पताल, डिग्री कालेज बनवाने का सपना दिखाया, लेकिन यह सपना हकीकत में तब्दील न हो सका। गाजियाबाद के मुख्य शहर में भी सीवर, ड्रेनेज सिस्टम और जाम के झाम से लोग परेशान है।

फिर बेहतरी का सब्जबाग दिखाने निकले प्रत्याशी
कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी केके शर्मा का कहना है कि 1985 में जब वह एमएलए बने तो सरकार भी उन्हीं की थी। उन्होंने पहली बार शहर में सोडियम लाइटें लगवाईं, विजयनगर में 3 रुपये प्रतिदिन के खर्च पर लोगों को मकान दिलाए।

सरकारी स्कूल बनवाया। अब विधायक बने तो लाइनपार क्षेत्र में गर्ल्स डिग्री कालेज, सरकारी अस्पताल, डाकघर, गंगाजल आपूर्ति कराने का प्रयास करेंगे। सरकार से पैसा लाकर सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम डेवलप कराएंगे।

बसपा प्रत्याशी सुरेश बंसल का कहना है कि अपने बीते कार्यकाल में उन्होंने शहर की ऐसी कालोनियों में सड़क, सीवर, नालियां बनवाई, जो नगर निगम की ओर से उपेक्षित था। गंगाजल आपूर्ति कराने, सरकारी अस्पताल और डिग्री कालेज बनवाने के लिए प्रयास किया, लेकिन प्रदेश में बसपा की सरकार न होने की वजह से सपोर्ट नहीं मिला। चुनाव जीतने के बाद फिर से प्रयास करेंगे।

भाजपा प्रत्याशी अतुल गर्ग का कहना है कि बीते पांच साल में विधायक ने कोई काम नहीं कराया। इस बार केंद्र में भी भाजपा सरकार है। चुनाव जीतने के बाद केंद्र सरकार के सहयोग से शहर के लिए गंगाजल, सरकारी स्कूल और अस्पताल बनवाने का काम करेंगे। शहर को विकास की राह पर ले जाएंगे।
विज्ञापन


गाजियाबाद विधानसभा क्षेत्र में वोटर 
पुरुष मतदाता            236919
महिला मतदाता         186988
अन्य                           12

कुल मतदाता        423919
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें