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त्योहारी सीजन में भी नहीं रियल एस्टेट के अच्छे दिन

Thu, 13 Oct 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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अन्य - फोटो : अमर उजाला
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त्योहारी सीजन भी रियल एस्टेट में अच्छे दिन नहीं ला पाया। नवरात्र और दशहरा जैसे बड़े त्योहार निकल गए लेकिन रियल एस्टेट के कारोबार में बूम नहीं आ सका। बूम न आने के पीछे जहां मार्केट में व्हाइट मनी का न होना एक कारण माना जा रहा है, वहीं दूसरा कारण खरीदारों के साथ बिल्डरों की वादाखिलाफी भी है।
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आवंटियों को समय पर पजेशन न देना, फ्लैट्स में आधी अधूरी सुविधाएं, पार्किंग के पंगे, कॉमन एरिया पर कब्जे आदि ऐसे बड़े कारण हैं, जिन्होंने एनसीआर में बिल्डर प्रोजेक्ट में रेजिडेंट्स की रुचि को कम किया है। यही कारण है कि आज लोगों की पहली पसंद रेडी टू मूव फ्लैटस हैं, लेकिन यहां भी खरीदारों की संख्या बहुत कम है।

 एनसीआर में चार-पांच साल पहले तक प्रॉपर्टी में जबरदस्त बूम था। दिल्ली और नोएडा में आशियाना न बना पाने वाले रेजिडेंट्स ने गाजियाबाद को चुना। सरकारी के अलावा कई प्राइवेट बिल्डर प्रोजेक्ट यहां तेजी से बढ़े। ब्लैक मनी का इनवेस्ट करने वालों ने दो के चार करने के लिए इसे और तेजी दी।
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लेकिन संपत्ति खरीद में दो लाख से ज्यादा का भुगतान चेक से ही किए जाने के नियम के बाद से ऐसे इन्वेस्टरों ने हाथ खींच लिए। एसे लोगों की वजह से ही प्रापर्टी में अप्रत्याशित तेजी आई थी।

अब रह गए वास्तविक खरीददार। जरूरतमंदों ने बैंकों से लोन लेकर फ्लैट्स खरीदे, लेकिन वक्त पर पजेशन न मिलने से आवंटियों की उम्मीदें टूट गईं। अदालत तक के चक्कर काटने पड़े। कहीं फ्लैट्स मिले भी तो आधी अधूरी सुविधाओं के साथ।

बिल्डरों ने फ्लैट्स के खरीदारों का पैसा नए प्रोजेक्ट्स में लगा दिया, जिससे पुराने प्रोजेक्ट ठप हो गए। खरीदारों पर दोहरी मार पड़ी। बैंक लोन की किस्त और मकान का किराया भी। इससे लोगों का विश्वास टूटा और बिल्डर प्रोजेक्ट कंक्रीट के आधे अधूरे जंगल बनकर रह गए।

बिल्डरों की वादाखिलाफी के चलते हालात यह हो गए कि जहां फ्लैट्स बनकर तैयार भी हैं, वहां भी खरीददार नहीं मिल रहे। क्रेडाई राजनगर एक्सटेंशन के सचिव गौरव गुप्ता भी मानते हैं कि मार्केट में इनवेस्टर नहीं लौटे हैं। असल में जिस सोच के साथ निवेशकों ने प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया था, उन्हें वैसा रिजल्ट नहीं मिला। यही कारण है कि उन्होंने हाथ खींच लिए।

राजनगर एक्सटेंशन में टूबीएचके 26 लाख से शुरू
जानकारों के अनुसार, टूबीएचके फ्लैट की कीमत राजनगर एक्सटेंशन में करीब 26 लाख से 30 लाख, इंदिरापुरम में 40 से 45 लाख, वैशाली में 35 से 40 लाख, स्वर्णजयंती पुरम में 20 से 30 लाख, शालीमार गार्डन में 30 से 40 लाख, वसुंधरा में 35 से 45 लाख चल रही है।

इन इलाकों में थ्रीबीएचके फ्लैट की कीमत टूबीएचके से 5 से 15 लाख अधिक रखी गई है। हालांकि कीमतों में उतार-चढ़ाव भी चल रहे हैं। सबसे अधिक कीमत मोहन नगर स्थित एक निर्माणाधीन सोसायटी की है, जहां टूबीएचके के लिए 56 लाख से कीमत शुरू है गाजियाबाद बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने बताया कि टीएचए में चार साल पुराना रेट रखने पर फ्लैट्स बिकने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

सरकारी सस्ते आवासों ने दिया झटका
मोदी सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार का पूरा फोकस हर सिर को छत मुहैया कराना है। यही कारण है कि तमाम सरकारी योजनाओं में सस्ते से सस्ते मकान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे बिल्डरों को भी अपने प्रोजेक्ट्स बेचने के लिए कीमतें कम रखनी पड़ रही हैं।


बिल्डर ले रहे गिफ्ट्स का सहारा
फ्लैट्स के साथ अब बिल्डर दस ग्राम सोने का सिक्का, आई फोन, आल्टो कार, एक साल की मेंटेनेंस फ्री, विकास शुल्क माफ, कार पार्किंग फ्री, बैंक की प्रोसेसिंग फीस फ्री, सर्विस टैक्स माफ, पीएलसी माफ, कुल कीमत में रजिस्ट्री शामिल, कई कीमती इलेक्ट्रानिक्स आइटम आदि देकर ग्राहकों को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं।

जीडीए में सन्नाटा
करीब तीन साल पहले तक त्योहारों के मौसम में जीडीए में नक्शा पास कराने वालों की भीड़ लगी रहती थी लेकिन इस साल सन्नाटा है। चीफ टाउन प्लानर इश्तियाक अहमद ने बताया कि त्योहारी सीजन में भी नक्शा पास कराने वालों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

मोरटी मोड़ से राजनगर एक्सटेंशन रोड होगी 6 लेन

राजनगर एक्सटेंशन रोड पर मोरटी मोड़ से राजनगर एक्सटेंशन चौराहे तक सड़क की चौड़ाई एक-एक लेन और बढ़ाई जाएगी। इस दूरी में सड़क छह महीने के अंदर छह लेन की हो जाएगी। इससे मोरटी मोड़ और अजनारा के पास लगने वाले जाम से लोगों को मुक्ति मिल जाएगी।

15.65 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य इसी महीने शुरू कर दिया जाएगा। सड़क किनारे बिजली के पोल हटाए जाने के बाद सड़क बनाने का काम शुरू होगा। साथ-साथ मुख्य नाले का निर्माण भी किया जाएगा।

जीटी रोड से राजनगर एक्सटेंशन रोड में प्रवेश करने पर मोरटी मोड़ तक सड़क छह लेन की है। इसके बाद सड़क चार लेन की है। चार लेन की सड़क के दोनों ओर कई सोसायटीज हैं। यहां पीक टाइम में अक्सर जाम लग जाता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस सड़क की चौड़ाई बढाने की मांग करते आए हैं।

जीडीए के अधिशासी अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन रोड बनने से पहले मोरटी मोड़ से राजनगर एक्सटेंशन चौराहे तक की दूरी में सबसे अधिक आबादी बसने के चलते बिजली के खंभे पहले ही गढ़ गए थे इसलिए सड़क चार लेन की ही रह गई।

उन्होंने बताया कि छह लेन की सड़क के लिए बिजली के खंभे ही सबसे बड़ा अड़ंगा हैं, इन्हें शिफ्ट करने में तीन-चार महीने का समय लग जाएगा। उन्होंने बताया कि मार्च तक करीब तीन किलोमीटर की दूरी में सड़क छह लेन की हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि बिजली के पोल हटते ही सड़क किनारे सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि छह माह बाद पूरी राजनगर एक्सटेंशन रोड दुरुस्त दिखेगी, इससे इस रोड पर गाड़ियों की स्पीड पहले से बढ़ जाएगी।
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