गाजियाबाद। गोशाला में गोवंशों के भूखे रहने की नौबत आ गई है। बीते तीन माह से चारे का पैसा नहीं आने से यह स्थिति बनी हुई है। अब कई गोशाला संचालकों को उधार चारा देने से किसान और विक्रेताओं ने मना कर दिया है। इससे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पशु पालन विभाग ने शासन स्तर से निर्णय लिए जाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है।
जिले की 25 गोशालाओं में करीब 5500 पशुओं का आश्रय है। शासन से प्रति पशु 50 रुपये के हिसाब से चारे का पैसा आता है। पशुओं के चारे की अंतिम किस्त सितंबर में आई थी। अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर का पैसा अभी तक नहीं आया है। ग्यासपुर गांव में गोशाला का संचालन कर रहे राजदेव त्यागी ने बताया कि पहले जहां से पशुओं का चारा आता था, उनसे एक माह का उधार कहकर चारा लिया था। आज-कल आज-कल कहकर एक माह और निकाल दिया। एक माह पहले उसने मना कर दिया। मजबूरी में दूसरे विक्रेता से संपर्क किया। उसने एक माह बाद चारे की आपूर्ति करने से मना कर दिया। अब दिक्कत खड़ी हो गई है। जबकि, सर्दी में पशु ज्यादा चारे खाते हैं। सर्दी से बचाव को लेकर उनको गुड़, तेल आदि गर्म तासीर की सामग्री भी देनी पड़ती है। इससे खर्च और बढ़ जाता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से मिले तो उन्होंने शासन स्तर से पैसा आने की बात कही। इस बारे में जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.एसपी पांडेय ने बताया कि शासन को इस संबंध में पत्राचार किया गया है। एसआईआर की वजह से भुगतान का काम थोड़ा प्रभावित हुआ है। पशु चारा विक्रेताओं से गोशाला संचालकों का समन्वय कराया जा रहा है। उनसे सहयोग की अपील की जा रही है। आगे प्रयास रहेगा कि गोशाला संचालकों काे एडवांस में भुगतान कराया जाए।