गाजियाबाद। शहर में सस्ती मजदूरी के लिए दुकानों पर नाबालिगों से काम कराया जा रहा है। न काम के घंटे तय हैं, न मानकों का पालन और न ही उनकी पढ़ाई की चिंता। बुधवार को श्रम विभाग और एएचटीयू की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर अलग-अलग क्षेत्रों से नौ नाबालिग कामगारों को चिह्नित किया है। इस मामले में छह दुकानदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जांच में सामने आया है कि नाबालिगों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम देकर काम लिया जा रहा था।
उप श्रम आयुक्त डॉ. दिव्य प्रताप सिंह ने बताया कि टीम ने कई ऑटोमोबाइल रिपेयर दुकानों पर जांच की। यहां 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के नौ किशोर काम करते हुए मिले। पूछताछ में पता चला कि उनसे 10 से 12 घंटे तक काम लिया जा रहा था, जबकि नियमानुसार छह घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता। साथ ही उन्हें खतरनाक मशीनों और जोखिम भरे कार्यों में लगाया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि नियमों के तहत 14-17 वर्ष के किशोरों को यदि काम पर रखा जाता है तो उसकी सूचना श्रम विभाग को देनी होती है, उनके काम के घंटे, सुरक्षा और पढ़ाई का ध्यान रखना होता है। जांच में इस नियम की भी अनदेखी मिली। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर सभी के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।
दाखिले के बाद भी नहीं जा पा रहे स्कूल जांच में यह भी सामने आया कि चिह्नित किए गए नौ किशोरों में से तीन के स्कूल में दाखिले हैं, लेकिन काम के चलते वे नियमित स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। श्रम विभाग ने कहा कि नाबालिगों से काम के नाम पर शोषण नहीं होने दिया जाएगा। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि यदि वे तय मानकों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग आगे भी इस तरह के अभियान चलाकर नाबालिग श्रम पर रोक लगाएगा।