गाजियाबाद। साईं उपवन में सड़क निर्माण, मिट्टी भराव व अन्य निर्माण गतिविधियों के आरोपों का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार समेत आठ संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। न्यायाधिकरण ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जिला प्रशासन, केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई को होगी।
यह आदेश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पूर्व नगर निगम पार्षद राजेंद्र त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने पक्ष रखा।
याचिका में कहा गया है कि साईंं उपवन गाजियाबाद मास्टर प्लान-2031 के तहत अधिसूचित नगर वन क्षेत्र है। इसका उद्देश्य केवल शहरी वानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके बावजूद क्षेत्र में सड़क निर्माण, अन्य संरचनाओं का विकास और मिट्टी भराव जैसे गैर-वानिकी कार्य किए जा रहे हैं।
याचिका के अनुसार, इससे हजारों पेड़ों वाला मौजूदा हरित क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। करीब 100 एकड़ अतिरिक्त भूमि, जिसका उपयोग भविष्य में वनीकरण और वृक्षारोपण के लिए किया जा सकता था, के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है।
अधिवक्ता ने दलील दी कि यह गतिविधियां वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत लागू राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की भावना व उद्देश्यों के विपरीत हैं। उनका कहना है कि गाजियाबाद देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है। ऐसे में शहरी वन क्षेत्र का संरक्षण पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 23 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को साईंं उपवन में कथित अवैध निर्माण गतिविधियों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर न तो प्रभावी निरीक्षण किया गया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की कार्ययोजनाओं में खुले क्षेत्रों को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है, जबकि साईंं उपवन जैसा समर्पित शहरी वन क्षेत्र निर्माण गतिविधियों से प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो लाखों स्थानीय नागरिक स्वच्छ और ताजी हवा के एक महत्वपूर्ण स्रोत से वंचित हो सकते हैं।