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नया नाम : हरनंदीनगर दूधेश्वरनगर या कुछ और

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गाजियाबाद। गाजियाबाद का नाम बदलने का प्रस्ताव नगर निगम बोर्ड से पास होते ही सबसे पहला सवाल यह उठा है कि नया नाम क्या होगा? हालांकि, नगर निगम ने इसका फैसला शासन पर छोड़ दिया है, लेकिन कई नाम लंबे समय से चर्चा में है। इनमें सबसे प्रमुख गजनगर, दूधेश्वरनगर और हरनंदीनगर हैं। इनके अलावा और भी नाम हैं। हर नाम के पीछे कोई वजह है। नाम बदलने की यह मांग लगभग तीन दशक से उठ रही है। चुनाव आते ही यह जोर पकड़ लेती है। इस बार लोकसभा चुनाव के साल में इसका प्रस्ताव पास हुआ है।
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रसम संस्था गाजियाबाद का नाम बदलने के लिए कई साल से मुहिम चला रही है। राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, भाजपा के लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर और साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा भी नाम बदलने की मांग उठा चुके हैं। देखना यह है कि नगर निगम के प्रस्ताव पर शासन क्या निर्णय लेता है। गाजियाबाद से पहले अलीगढ़ और फिरोजाबाद के नगर निगम ऐसे प्रस्ताव पास कर चुके हैं। दोनों प्रस्ताव पर शासन ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ और फिरोजाबाद का नाम चंद्रनगर किए जाने का प्रस्ताव पास किया गया था।
प्रदेश के और भी कई शहरों के नाम बदलने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इनमें आगरा का नाम बदलकर अग्रवन, अलीगढ़ का हरिगढ़, फिरोजाबाद का चंद्रनगर और मुरादाबाद का पीतांबरपुर किए जाने की मांग प्रमुख हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह मुजफ्फरनगर का नाम बदलने की मांग उठा चुके हैं। सुल्तानपुर और शाहजहांपुर का नाम बदलने की मांग भी समय-समय पर उठती रहती है। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया जा चुका है।
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सांसद, विधायक भी उठा चुके मांग



1. गजनगर
मार्च 2021 में साहिबाबाद विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने विधानसभा सत्र के दौरान गाजियाबाद का नाम बदलकर गजनगर करने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना है कि महाभारत काल में दिल्ली यानी उस समय के इंद्रप्रस्थ में जब पांडवों का राज था, तब गाजियाबाद को गजप्रस्थ कहा जाता था। यह हस्तिनापुर का हिस्सा था। यहां पांडवों की सेना के हाथी (गज) बंधा करते थे।



2. दूधेश्वरनगर
कई संस्थाएं और महंत मांग कर रहे हैं कि गाजियाबाद का नाम दूधेश्वरनगर किया जाए। इसके पीछे उनका तर्क है कि जिले का नाम दूधेश्वरनाथ मंदिर के नाम पर होना चाहिए।


3. हरनंदीनगर
गाजियाबाद के नए नाम के रूप में हरनंदीनगर का विकल्प भी सुझाया गया है। यह नाम यहां से होकर गुजरने वाली हिंडन नदी के नाम पर है। पुराणों में हिंडन को पंचतीर्थी और हरनंदी भी कहा गया है।



4. अग्रसेननगर
नवंबर,2018 माह में भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉ. अनिल अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गाजियाबाद का नाम बदलकर महाराज अग्रसेन नगर करने की मांग की थी। उनका कहना है कि उन्होंने अग्रसेननगर नाम सुझाया था, लेकिन नाम कुछ और भी हो सकता है। सबसे जरूरी है कि गाजियाबाद नाम नहीं रहना चाहिए।



5. शिवाजीनगर
लोनी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर गाजियाबाद का नाम बदलकर शिवाजीनगर रखे जाने की मांग सरकार से कर चुके हैं। उनका कहना है कि छत्रपति शिवाजी यहां से होकर गुजरे थे। उन्होंने दूधेश्वरनाथ मंदिर में यज्ञ किया था। वह यज्ञशाला आज भी मौजूद है।





गाजीउद्दीन के नाम पर पड़ा गाजियाबाद

गाजियाबाद शहर की स्थापना 1740 में मुगल बादशाह मोहम्मद शाह के वजीर गाजीउद्दीन ने की थी। गाजीउद्दीन ने ग्रांड ट्रंक (जीटी) रोड के किनारे एक शहर बसाया था। इसके चार दरवाजे थे। शहर का नाम गाजीउद्दीन के नाम पर ही गाजीउद्दीन नगर पड़ गया। यह बाद में गाजियाबाद कहा जाने लगा।



1976 में बना था जिला
14 नवंबर 1976 से पहले गाजियाबाद जिला मेरठ की तहसील थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 14 नवंबर 1976 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर गाजियाबाद को जिला घोषित किया। इसका क्षेत्र दिल्ली की सीमा से ब्रजघाट तक था। 28 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने हापुड़ को अलग जिला बना दिया। इसे नाम दिया पंचशील नगर। बाद में जुलाई 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिर से हापुड़ कर दिया।
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