नगर निगम की कब्जाई जा रही बेशकीमती जमीन को लेकर महापौर ने भी चिंता जताई है। उन्होंने संपत्ति विभाग में लेखपालों और तहसीलदार समेत स्टाफ की कमी व पार्षदों-अफसरों की मिलीभगत को भी जमीनों पर कब्जा होने का कारण माना है।
अब मंडलायुक्त को पत्र भेजकर उन्होंने हाईपावर कमेटी गठित कर सरकारी जमीनों की पैमाइश कराने की मांग की है, ताकि जमीनों की सुरक्षा की जा सके।नगर निगम की एक हजार बीघा से ज्यादा जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं। विजयनगर से लेकर राजनगर एक्सटेंशन में आबादी के बीच आ चुकी सरकारी जमीन पर अब इमारतें खड़ी हो चुकी है।
भूमाफियाओं ने रजिस्ट्री अपनी जमीन पर की और कब्जा सरकारी जमीनों पर दे दिया। हालांकि अभी भी सैंकड़ों एकड़ जमीन खाली पड़ी है, लेकिन निगम को अधिकांश जमीनों का पता ही नहीं है। शहर की सूरत बदल जाने से यह जमीन अब घनी आबादी के बीच आ चुकी है। बीते दिनों डूंडाहेड़ा में सरकारी जमीन के विवाद को लेकर गोलियां तक चल चुकी हैं।
कई पार्षदों के नाम भी सरकारी जमीन बेचने में शामिल होने के तौर पर सामने आ चुके हैं। अब महापौर ने निगम की जमीन चिह्नित कराने के लिए मेरठ मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि निगम के पास स्टाफ की कमी है। इसकी वजह से जमीनें कब्जाई जा रही है।
कई बार तो शिकायत यह भी मिली है कि पार्षद और अधिकारी भी भूमाफियाओं का सहयोग करते हैं। उन्होंने हाईपावर कमेटी का गठन कर जमीनों की पैमाइश कराने की मांग की है।