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न मैडम मिलीं न सहायिका, लटका मिला ताला

Sun, 03 Jul 2016 12:36 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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आंगनबाड़ी केंद्र पर लटका ताला - फोटो : अमर उजाला
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कागजों में जोर-शोर से राज्य पोषण मिशन अभियान चल रहा है, लेकिन हकीकत इससे इतर है। अधिकारी भी जमीनी हकीकत जानने की जहमत नहीं उठाते । यही वजह है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री भी मनमर्जी से केंद्र चला रही हैं।
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आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को रखने का सरकारी नियम तो सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक का है, लेकिन चार घंटे रोजाना तो दूर चार -चार दिन तक केन्द्र नहीं खुल रहे। इन केन्द्रों पर तैनात आंगनबाड़ियों की बच्चों को पोषाहार खिलाने के साथ ही बेसिक शिक्षा देने की भी जिम्मेदारी है।

कागजों में यह सब हो भी रहा है। हर महीने केंद्रों का किराया भी खाते में पहुंच रहा है और कार्यकत्रियों को उनका मानदेय और केंद्र के लिए पोषाहार भी मिल जाता है। इस सबके बीच अगर कुछ नहीं हो रहा तो वह है केंद्रों का संचालन।
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अमर उजाला टीम जब शहर के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंची तो वहां लटके हुए ताले हकीकत बयां कर रहे थे। कहने की जरूरत नहीं कि जब केन्द्र ही नियमित नहीं खुलते तो बच्चे भी नहीं आते। ऐसे में केन्द्रों पर वितरण को आने वाले पोषाहार का क्या होता होगा?

यह मिला हाल-
बोंझा में विद्यालय प्रांगण में ही आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। शुक्रवार को सुबह 10:40 पर स्कूल पर ताला लटक रहा था। स्थानीय निवासी हुकुम चंद त्यागी ने बताया कि उन्हें मालूम है कि यहां केंद्र है लेकिन यह कब खुलता है और कब बंद होता है, कुछ पता ही नहीं चलता।

वाल्मीकि बस्ती में केंद्र पर ताला लटका हुआ मिला। बच्चों ने बताया कि केंद्र सप्ताह में दो दिन खुलता है। कभी दलिया मिलता है तो कभी सत्तू। दीनागढ़ी में आंगनबाड़ी केंद्र  शुक्रवार को सुबह 11 बजे तक बंद पड़ा था।

केंद्र पर न तो बच्चे थे, न ही आंगनबाड़ी और सहायिका। बच्चों ने बताया कि मैडम कभी-कभी आती हैं। दीनागढ़ी में ही दूसरे मोहल्ले में भी आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। यहां आंगनबाड़ी शुक्रवार को केंद्र पर नहीं थी।

प्रताप विहार सेक्टर-12 बंजारा चौक पर जिस मकान में आंगनबाड़ी केंद्र चलता है, वहां भी सुबह 9:30 तक न तो आंगनबाड़ी कार्यकत्री आई थी और न बच्चे। जिनके मकान में सेंटर चलता है उनका कहना था कि आंगनबाड़ी यहां बच्चों को पढ़ाती है, जो आज नहीं आईं। 29 जून को डीपीओ द्वारा प्रहलाद गढ़ी में भी केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। इनके निरीक्षण में भी केंद्र बंद मिले थे। इसके लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी ऊषा देवी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

 बोले अधिकारी
आंगनबाड़ी की ड्यूटी कई जगह लगाए जाने से केंद्रों पर अव्यवस्था है। फिर भी सहायिका द्वारा केंद्र संचालन के निर्देश हैं। सेंटर यदि नहीं चल रहे हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -  श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी

 1373 केंद्रों पर पंजीकृत हैं 161546 बच्चे
गाजियाबाद में कुल 1393 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ऑन रिकार्ड में 161546 बच्चे पंजीकृत हैं। नियमानुसार इन बच्चों को हर महीने 5, 15 और 25 तारीख को पोषाहार पैकेट वितरित करने का नियम है। इसके साथ ही प्रतिदिन बच्चों को दलिया परोसने का प्रावधान है।
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