पूर्व राज्यसभा सांसद नरेंद्र कश्यप ने कहा कि हालांकि वह बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं लेकिन पार्टी से उनका मोह भंग नहीं हुआ है। बसपा में उनका विश्वास आज भी बरकरार है। पार्टी को उनके निलंबन वापसी पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह बातें बृहस्पतिवार को एक प्रेसवार्ता में कहीं।
नरेंद्र कश्यप ने 17 ओबीसी जातियों को एससी कैटेगरी में शामिल करने, पिछड़ी जातियों का केंद्र व सभी राज्यों में 17 प्रतिशत आरक्षण पूरा करने और 5 अप्रैल को महर्षि कश्यप निषाद राज जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग को लेकर 30 सितंबर को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने का एलान भी किया।
उन्होंने कहा कि वह इन सामाजिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत रहे हैं। इस प्रदर्शन का चुनाव या सियासत से जोड़कर न देखा जाए। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने इन मुद्दों को उठाया था, लेकिन पिछले 20 वर्षों में राज्य व केंद्र सरकारों ने इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।
कश्यप ने कहा कि इन मांगों को लेकर वेस्ट यूपी के 40 जिलों में धरना दिया जाएगा। इसके बाद लखनऊ और दिल्ली में आंदोलन करेंगे। फिर भी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो रेल रोको अभियान चलाया जाएगा।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बसपा से उनका 30 साल पुराना रिश्ता है और यह रिश्ता बहुत खास है। उन्होंने बताया कि संसद सत्र के दौरान बसपा प्रमुख मायावती से उनकी दुआ-सलाम हुई थी।
कश्यप ने कहा कि वे पूर्व मंत्री हीरालाल कश्यप के आभारी हैं कि वह रविवार को उनकी पुत्रवधू हिमांशी कश्यप की शोक सभा में आए। उन्होंने कहा कि हिमांशी सिर्फ उनकी ही बेटी नहीं थी बल्कि वह मेरी भी बेटी थी।
बता दें कि 6 अप्रैल को हिमांशी की मौत के बाद हीरालाल कश्यप ने नरेंद्र कश्यप के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज कराया था। इस घटना के बाद इन दोनों को पार्टी ने निष्कासित कर दिया था।