गाजियाबाद। 11 जुलाई की रात को झुग्गियों से अगवा कर सात वर्षीय बच्ची को निर्माणाधीन बिल्डिंग में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में नंदग्राम थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह की लापरवाही उजागर हुई है। रात 11 बजे परिजनों ने पुलिस को सूचना दे थी। मोरटा चौकी इंचार्ज मौके पर पहुंचे और उन्होंने थाना प्रभारी को सूचना देने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। सूचना मिलते ही डीसीपी सिटी धवल जायसवाल मौके पर पहुंचे और नंदग्राम थाना प्रभारी को कॉल की लेकिन रिसीव नहीं हुई। फ्लैट पर आराम फरमा रहे नंदग्राम थाना प्रभारी रात दो बजे घटना स्थल पर पहुंचे। कमिश्नरेट की फीडबैक सेल को नागरिकों से मिली शिकायतों के आधार पर नंदग्राम थाना प्रभारी को लापरवाही बरतने पर सीबीआईटी अपराध शाखा भेजा गया है। उनकी जगह आगरा से आए संतोष कुमार त्रिपाठी को नंदग्राम थाना प्रभारी बनाया गया है। इसके साथ ही नंदग्राम थाना कार्यालय की गोपनीयता भंग होने पर आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।
डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि फीडबैक सेल और कुछ पीड़ितों से मिली शिकायत के बाद नंदग्राम थाना प्रभारी का हटाया गया है। थाना कार्यालय की जीडी, चार्जशीट और गोपनीय दस्तावेज लीक होने पर आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। नंदग्राम थाना कार्यालय में तैनात मुख्य आरक्षी मुकेश कुमार, रोहित कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर स्वाति, आरक्षी गौरव चौधरी, विकास कुमार, संदीप यादव, मनोज चौधरी और आयुष महामुनि को लाइन हाजिर किया गया है। इसके साथ ही नगर जोन के 202 मुख्य आरक्षी और आरक्षियों का स्थानांतरण जोन के अंतर्गत ही किया गया है।
.....
ये है चर्चा
बीते दिनों ही एएसआर सेंट्रल ऐवेन्यू प्रोजेक्ट के बिल्डर संदीप कुमार गुप्ता और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी के बिल्डर वरूण मक्कड़ समेत कई अन्य के खिलाफ 40 निवेशकों से 30.56 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा नंदग्राम थाने में दर्ज किया गया था। निवेशकों ने आरोप लगाया कि एफआईआर में हल्की धाराएं लगाई गई हैं। इस मामले में नंदग्राम थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह को हटाकर क्राइम ब्रांच भेजा गया है।