गाजियाबाद। सीवर और नालों में अब गोबर नहीं बहाया जाएगा। नगर निगम शहर में गोबर बैंक बनाएगा। पीपीपी मॉडल पर बनने वाले इन गोबर बैंक में डेयरी फार्म से गोबर खरीदकर उससे खाद, मीथेन गैस और बिजली बनाई जाएगी। निगम के इस प्रोजेक्ट से न केवल सीवर-नालों के जाम होने की समस्या दूर होगी, बल्कि शहर भी स्वच्छ होगा।
नगर निगम ने पूर्व में डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए नंदग्राम की जमीन चिह्नित की थी, लेकिन जीडीए ने यहां कालोनी बसा दी। शहर के बीच में आ गई डेयरियों की वजह से गंदगी हो रही है। डेयरी फार्म संचालक गोबर को सीवर और नालों में बहा देते हैं।
इसकी वजह से लाइनें जाम हो जाती है। ट्रंक लाइन जाम हो जाने की वजह से अब केंद्र और यूपी सरकार को मिलकर 131 करोड़ रुपये उसकी सफाई पर खर्च करने पड़ रहे हैं। यही नहीं इसकी वजह से कालोनियों में सीवर लाइनें ओवरफ्लो कर रही हैं। ऐसे में अब नगर निगम ने शहर में पीपीपी मॉडल पर गोबर बैंक बनाने की प्लानिंग की है।
ऐसे लागू होगी योजना
नगर निगम प्राइवेट कंपनी को लैंड देगा और पीपीपी मॉडल पर वहां कंपोस्ट या बिजली बनाने का प्लांट लगाया जाएगा। प्राइवेट कंपनी डेयरी फार्म संचालकों से फ्री या न्यूनतम पैसा देकर गोबर लेंगी। इस गोबर बैंक तक पहुंचाया जाएगा और खाद व मीथेन गैस बनाई जाएगी।
इस मीथेन गैस से पावर प्लांट का टर्बाइन चलाया जाएगा, जिससे बिजली बनाई जाएगी। इस बिजली को नगर निगम खुद या पावर कारपोरेशन को बेच सकेगा। इससे होने वाली आमदनी से गोबर बैंक का संचालन होगा।
जल्द ही गोबर बैंक बनाने की योजना पर काम शुरू किया जाएगा। जमीन चिह्नित कराकर इस क्षेत्र में काम करने वाली फर्मों को आमंत्रित किया जाएगा। प्राइवेट फर्मों के जरिए योजना को लागू कराया जाएगा। - अब्दुल समद, नगरायुक्त