गाजियाबाद। महापौर के फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद नगर निगम अधिकारियों ने कंप्यूटर ऑपरेटर आपूर्ति करने वाली फर्म का 23 लाख रुपये का भुगतान रोक दिया है। कंप्यूटर प्रभारी ने फर्म को भुगतान करने के लिए 23 लाख की बिलिंग कर पत्रावली न सिर्फ तैयार कर ली थी, बल्कि अपर नगरायुक्त से उस पर स्वीकृति भी ले ली थी। महापौर ने सवाल उठाए तो अब भुगतान रोककर प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
महापौर सुनीता दयाल ने आरोप लगाए थे कि कंप्यूटर ऑपरेटरों की आपूर्ति करने वाली फर्म की ओर से ठेका लेने के लिए निविदा के साथ जमा किए गए कई दस्तावेज फर्जी हैं। उन्होंने ठेका देने की अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल खड़े किए थे। इसके बाद आनन फानन भुगतान रोक दिया गया है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी व कंप्यूटर प्रभारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि कंपनी की बिलिंग की पत्रावली रोक दी गई है। फिलहाल जांच पूरी होने तक कंपनी को भुगतान नहीं किया जाएगा।
यूजर चार्ज वसूलने का ठेका देने में भी घोटाले का आरोप
महापौर सुनीता दयाल ने सोमवार को नगर आयुक्त को पत्र भेजकर नगर निगम में घरों से कूड़ा उठाने की एवज में यूजर चार्ज वसूलने का ठेका देने में भी घोटाले के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जिन तीन फर्माें ने निविदा में भाग लिया था, वह तीनों झारखंड की हरमु कॉलोनी की हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तीनों फर्माें ने मिलकर निविदा में भाग लिया था।
महापौर का कहना है कि उन्होंने दो माह पहले मुख्य कर निर्धारण अधिकारी से ठेका ले चुकी फर्म स्पैरो सॉफ्टेक प्रा.लि. के डायरेक्टर्स व प्रमोटर्स और अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों का प्रोफाइल, आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि पूरा विवरण मांगा था, लेकिन पत्रावली में वह नहीं थे। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया था कि कंपनी के 40 कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन सूची मांगी तो सिर्फ 30 कर्मचारियों की सूची दी गई। उन्होंने कई अन्य आरोप लगाए हैं और इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।