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Ghaziabad News: नगर निगम बोर्ड करेगा संपत्ति कर का फैसला

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गाजियाबाद। चुनाव बीतते ही डीएम सर्किल रेट के हिसाब से संपत्ति कर बढ़ाने की अटकलें फिर शुरू हो गई हैं। पुरानी दरों से संपत्ति कर जमा नहीं किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इस बीच महापौर सुनीता दयाल ने स्पष्ट कर दिया है कि डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर के बिल जारी नहीं होंगे। प्रत्येक दो साल में दस प्रतिशत की दर से संपत्ति कर बढ़ाने का नियम नगर निगम बोर्ड ने पास किया हुआ है, इसमें किसी भी तरह का संशोधन बोर्ड की मंजूरी से ही हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संपत्ति कर बढ़ेगा या नहीं, इसका फैसला बोर्ड ही करेगा।
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बीते 9 जनवरी को नगर निगम की तरफ से डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर बढ़ाने की अधिसूचना जारी की गई थी, जबकि इसी दिन बोर्ड बैठक में पार्षदों की तरफ पूछे गए प्रश्न पर अधिकारियों ने कर बढ़ाने से इन्कार कर दिया था। पार्षदों की तरफ से बोर्ड की अनुमति के बाद संपत्ति कर बढ़ाने के फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ था। 15 फरवरी को बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में एक अप्रैल 2024 से संपत्ति कर बढ़ाने का फैसला नगर निगम को टालना पड़ा था। अटकलें लगाई जा रही थीं कि चुनाव बाद बढ़े संपत्ति कर के बिल जारी होने शुरू हो जाएंगे। इस बीच पिछले तीन-चार दिनों में जोनल कार्यालयों में पुरानी दरों से संपत्ति कर नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए महापौर ने स्पष्ट किया है कि डीएम सर्किल रेट से संपत्ति कर नहीं बढ़ेगा। संपत्ति कर कितना बढ़ेगा और कब से बढ़ाया जाएगा, इस पर बोर्ड बैठक में चर्चा होगी। बोर्ड से जो प्रस्ताव पास होगा, उसे लागू किया जाएगा।
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पुरानी दरों से नहीं हो रहा टैक्स जमा
पूर्व पार्षद चेतन यादव ने बताया कि चार दिन पहले ही चिरंजीव विहार स्थित एक मकान के पुराने संपत्ति कर के भुगतान के सिलसिले में कविनगर जोनल कार्यालय गए थे। यहां तैनात क्लर्क ने पुरानी दरों से कर जमा करने से माना कर वापस लौटा दिया था। हालांकि, नई दरों पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। वार्ड 34 शहीदनगर प्रथम के पार्षद पति मो. कल्लन ने बताया कि संपत्ति कर बढ़ाकर लेने की कई शिकायतें मिली हैं। निगम की तरफ से बिल नहीं भेजे गए हैं, लेकिन मौके पर बढ़े हुए कर की पर्ची बनाकर दी जा रही है।
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पुरानी दरों पर ही संपत्ति कर के बिल भेजे जा रहे हैं। प्रत्येक चार साल में संपत्ति कर का पुर्ननिर्धारण होता है। अभी किसी तरह का संशोधन नहीं किया गया है।
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- विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त
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