गाजियाबाद। इंदिरापुरम कालोनी का हस्तांतरण लेने के लिए नगर निगम तैयार हो गया है। नगर निगम चुनाव से पहले अप्रैल के पहले हफ्ते में कालोनी का स्थलीय निरीक्षण कर निगम की टीम ने सर्वे रिपोर्ट तैयार कर ली है। हस्तांतरण के बाद करीब 301 करोड़ रुपये निगम को खर्च करने पड़ेंगे। यह खर्च अधूरे काम को पूरा कराने में आएगा। निगम जल्द ही सर्वे रिपोर्ट जीडीए को भेजकर पैसे की मांग करेगा।
नगर आयुक्त डॉ. नितिन गौड़ का कहना है कि नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक में यह मुद्दा रखा जाएगा। बोर्ड के माध्यम से एस्टिमेट जीडीए को भेजकर राशि की मांग की जाएगी। सर्वे में पाया गया है कि इंदिरापुरम की करीब 73 किलोमीटर रोड में 80 फीसदी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसे ठीक कराने पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
छह प्रमुख नाले जिनकी दीवार जर्जर हो गई हैं, उसे आरसीसी करने में करीब 90 करोड़ रुपये का खर्च बताया गया है। पेयजल लाइन 24.50 करोड़, सीवरेज सिस्टम को ठीक करने पर करीब 32.5 करोड़ और स्ट्रीट लाइट पर 8.7 करोड़ खर्च होने का आगणन तैयार कर लिया है। उद्यान पर 8.1 करोड़, स्वच्छता और कूड़े के निस्तारण पर 21.2 करोड़ का एस्टिमेट बनाया गया है। इसके अलावा 18 फीसदी जीएसटी भी लगेगा।
282 से हुआ 301 करोड़
पिछले साल जनवरी से इंदिरापुरम कालोनी के हस्तांतरण का मुद्दा तेज हो गया है। जीडीए कालोनी को हस्तांतरित करने के लिए निगम को पत्र भेज चुका है। पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी ने पिछली बोर्ड बैठक में बिना पैसे के कालोनी नहीं लेने मुद्दा उठाया था। सदन ने भी इसे जायज ठहराया था। नगर आयुक्त ने बताया कि जीडीए 100-150 करोड़ रुपये देने की बात किस्तों में कर रहा है। एक साल पहले कराए गए सर्वे में करीब 282 करोड़ का एस्टिमेट बना था। नगर निगम चुनाव से ठीक पहले डीएम के निर्देश पर अप्रैल के पहले हफ्ते में जीडीए और नगर निगम की टीम की संयुक्त टीम ने दोबारा सर्वे कर एस्टिमेट तैयार किया है।
17 करोड़ मिलता है सालाना टैक्स
इंदिरापुरम में की आबादी ढाई से तीन लाख है। यहां से नगर निगम को सालाना करीब 17 करोड़ गृहकर मिलता है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डाॅ. संजीव सिन्हा का कहना है कि निगम के पास कालोनी के आने के बाद कर गृहकर में और इजाफा होगा। निगम के मुख्य अभियंता एनके चौधरी ने बताया कि जीडीए और निगम की टीम का संयुक्त सर्वे पूरा हो गया है। जीडीए सचिव बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि सर्वे पूरा हो चुका है। करीब 150 करोड़ का एस्टिमेट तैयार किया गया था लेकिन निगम की ओर से शासन को पत्र लिखकर राय मांगी गई है। 301 करोड़ के एस्टिमेट की कोई जानकारी नहीं है।
कोट
नगर आयुक्त डाॅ. नितिन गौड़ का कहना है कि निगम के पास मेंटेनेंस लिए इतना बजट नहीं है। इंदिरापुरम कालोनी का हस्तांतरण लेने के लिए निगम तैयार है। जीडीए या तो काम पूरा कराकर हस्तांतरित करे या फिर पैसा दे जिससे अधूरे काम पूरे कराए जा सकें।