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मूली उखाड़ने गई सास-बहू की मौत: जिंदगी संवारने आए, जीवन उजड़ गया; हाथों की मेहंदी भी न छूटी, अब उठी अर्थी

Wed, 21 Oct 2026 02:55 PM IST
Sharukh Khan राजू मलिक, अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित भोवापुर गांव में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के ठेकेदार की लापरवाही ने दो महिलाओं की जान ले ली, जबकि एक युवती झुलस गई। तीनों सड़क निर्माण के दौरान 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन टूटने से करंट की चपेट में आ गईं। हादसे में जान गंवाने वाली दोनों महिलाएं सास-बहू थीं और खेत में मूली लेने गई थीं।
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ghaziabad news - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जिंदगी बनाने के लिए बदायूं का गांव छोड़ा। सोचा था कि गाजियाबाद में मेहनत-मजदूरी और सब्जियों की खेती से परिवार की जरूरतें पूरी होंगी। बच्चों की गृहस्थी बसेगी और धीरे-धीरे जिंदगी की मुश्किलें कम होती जाएंगी। मंगलवार सुबह जिस खेत में सब्जियां उगाकर परिवार का पेट पालते थे, वही उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक ठिकाना बन गया।
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यह दर्द है थान सिंह का, भोवापुर गांव में बिजली की टूटी लाइन की चपेट में आने से जिनकी पत्नी सत्यवती और बहू रूबी की मौत हो गई। उन्हें बचाने की कोशिश में बेटी देवश्री भी झुलस गई। थान सिंह जिस परिवार के बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे थे, एक हादसे ने उसकी खुशियां छीन लीं।

बदायूं जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र के खिरिया बारखपुर गांव निवासी थान सिंह का परिवार पीढ़ियों से सब्जियों की खेती करता रहा है। गांव में पांच बीघा जमीन है, लेकिन परिवार बढ़ने के साथ खर्च और जिम्मेदारियां भी बढ़ती गईं। बच्चों की परवरिश, उनकी पढ़ाई-लिखाई, शादी और घर का खर्च चलाने के लिए थान सिंह वर्ष 2023 में गाजियाबाद आ गए।
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यहां मोरटी क्षेत्र में एक किसान की जमीन ठेके पर लेकर सब्जियां उगाने लगे। परिवार के साथ भोवापुर में झुग्गी में रहने लगे। सुबह से खेत में मेहनत और फिर सब्जियों को बाजार तक पहुंचाने की भागदौड़ ही उनकी जिंदगी बन गई थी। परिवार के लोग भी इस काम में उनका हाथ बंटाते थे।
 

हाथों की मेहंदी भी नहीं छूटी, अब उठी अर्थी
थान सिंह की पत्नी सत्यवती ने करीब 32 वर्षों तक गरीबी और संघर्ष में उनका साथ निभाया। दोनों ने मिलकर बच्चों को बड़ा किया, उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए मेहनत की और एक-एक रुपया जोड़कर घर-परिवार को आगे बढ़ाया। बड़े बेटे जितेंद्र की शादी करीब ढाई वर्ष पहले भारती से हुई थी। उसका एक बेटा है। 

 

छोटे बेटे शिवम की शादी महज चार महीने पहले रूबी से हुई थी। नई बहू के आने से परिवार में खुशियां बढ़ी थीं। रूबी भी सास सत्यवती के साथ खेत में काम करने लगी थी। रूबी की नई गृहस्थी अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी। 

 

हाथों की मेहंदी का रंग फीका पड़ने से पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ ले लिया कि अब उसके मायके और ससुराल के लोगों को उसकी विदाई की तैयारी करनी पड़ रही है। जिस घर में उसे दुल्हन बनाकर लाया गया था, वहां अब उसके साथ सास सत्यवती की भी अर्थी उठी।
 

चार माह पहले हुई थी रूबी की शादी
थान सिंह ने बताया कि छोटे बेटे शिवम की शादी चार माह पहले ही रूबी से हुई थी। दो माह पहले वह बहू को गाजियाबाद लेकर आए थे। रूबी घर के कामकाज में हाथ बंटाने लगी थीं। परिवार की आजीविका सब्जी की खेती पर निर्भर थी। उन्होंने खेत में पालक, मूली और लौकी समेत अन्य सब्जियां उगा रखी थीं। पत्नी, बहू और बेटी सुबह खेत से सब्जियां तोड़कर ई-रिक्शा में भर देती थीं। इसके बाद शिवम मंडी में सब्जियां बेचने जाता था। मंगलवार सुबह भी तीनों इसी काम के लिए खेत में गए थे।

बेटी के हाथ पीले करने का सपना
थान सिंह की बेटी देवश्री 20 वर्ष की हैं। पिता उनके लिए योग्य वर तलाश रहे हैं। उनकी इच्छा है कि फरवरी में बेटी की शादी कर दें। इस हादसे ने भविष्य की उम्मीदों को संकट में डाल दिया है। मां-भाभी को बचाने में देवश्री भी करंट से झुलस गईं।

 

जिंदगी बर्बाद हो गई, जिम्मेदारों को दिलाऊंगा सजा
थान सिंह के मुताबिक, रूबी अपनी सास सत्यवती को मां की तरह मानती थी और उनके साथ ही रहने की इच्छा रखती थी। मंगलवार को दोनों के शव लेकर पैतृक गांव रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि दोनों का अंतिम संस्कार एक ही श्मशान घाट पर किया जाएगा।

हादसे से टूटे थान सिंह की आंखों में अपनों को खोने का दर्द है तो आवाज में न्याय की मांग भी। उन्होंने कहा कि मेरी जिंदगी तो बर्बाद हो ही गई है। अब मैं इस हादसे के जिम्मेदारों को सजा दिलाऊंगा। गांव से लौटकर हर अधिकारी की चौखट पर इंसाफ मांगूंगा।
 

सड़क निर्माण के दौरान टूटी लाइन, नहीं दी सूचना...करंट से सास-बहू की मौत
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित भोवापुर गांव में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के ठेकेदार की लापरवाही ने दो महिलाओं की जान ले ली, जबकि एक युवती झुलस गई। तीनों सड़क निर्माण के दौरान 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन टूटने से करंट की चपेट में आ गईं। हादसे में जान गंवाने वाली दोनों महिलाएं सास-बहू थीं और खेत में मूली लेने गई थीं।

 

ऊर्जा निगम के अवर अभियंता ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण के दौरान जेसीबी से बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचा। लाइन टूटने के बाद विभाग को सूचना भी नहीं दी गई। अवर अभियंता ने जीडीए के ठेकेदार अंकित गोयल और जेसीबी चालक के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है।

 

सोमवार रात टूटी लाइन की जानकारी ऊर्जा निगम को मंगलवार सुबह हादसे के बाद करीब सुबह आठ बजे मिली। इससे निगरानी के साथ ट्रिपिंग सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं।
 

बदायूं का है परिवार, यहां ठेके पर जमीन लेकर कर रहा खेती
एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने बताया कि मूलरूप से बदायूं जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र के खिरिया बारखपुर गांव निवासी थान सिंह परिवार के साथ पिछले तीन वर्षों से भोवापुर में केडीपी गोल चक्कर से गांव की ओर जाने वाले रास्ते पर झुग्गी में रह रहे हैं। उन्होंने मोरटी के एक किसान से भोवापुर में ही जमीन ठेके पर लेकर सब्जी की खेती कर रखी है।
 

नंदग्राम थाना क्षेत्र के भोवापुर गांव में मंगलवार सुबह करीब छह बजे थान सिंह की पत्नी सत्यवती (50), बहू रूबी (21) और बेटी देवश्री खेत में मूली उखाड़ने गई थीं। खेत में एलटी लाइन का तार टूटा पड़ा था। रूबी खेत में पहुंचीं तो तार उनकी गर्दन से छू गया और वह करंट की चपेट में आ गईं। बहू को बचाने के लिए सत्यवती ने तार हटाने की कोशिश की, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गईं। मां और भाभी को तड़पता देख देवश्री उन्हें बचाने दौड़ीं।

 

इसी दौरान तार उनके पैर से छू गया और वह दूर जा गिरीं। देवश्री के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने बांस की मदद से तार हटाया और तीनों को संजय नगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने सत्यवती और रूबी को मृत घोषित कर दिया, जबकि देवश्री को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर बदायूं रवाना हो गए। दोनों का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया जाएगा।

अवर अभियंता का आरोप, शटडाउन लिए बिना हो रहा था निर्माण कार्य
ऊर्जा निगम के अटौर सबस्टेशन के अवर अभियंता आकाश रस्तोगी ने बताया कि भोवापुर में भट्ठा संख्या पांच के पास इन दिनों सड़क निर्माण हो रहा है। सोमवार रात जेसीबी चालक ने पहले बिजली के खंभों पर मशीन का पंजा मारा और फिर मशीन तारों से टकरा गई। इससे दोनों तरफ की लाइन टूट गई। 

 

उनके मुताबिक, बिजली लाइन के नजदीक काम करने से पहले नियमानुसार शटडाउन लिया जाना चाहिए था। लाइन को नुकसान पहुंचने के बाद भी ऊर्जा निगम को तत्काल सूचना नहीं दी गई। समय रहते सूचना मिल जाती तो बिजली आपूर्ति बंद कर हादसे को रोका जा सकता था। अवर अभियंता ने बताया कि घटना देखने वाले लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
 

250 करोड़ के बिजनेस प्लान के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
ऊर्जा निगम की ओर से विद्युत संसाधनों को दुरुस्त करने के लिए 2025-26 के बिजनेस प्लान में 250 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि खर्च की जा रही है। इसके बावजूद विद्युत लाइनों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। भोवापुर में रात में लाइन टूटने के बाद भी समय रहते सूचना नहीं मिल सकी। 
 

ऐसे में यह जांच का विषय है कि लाइन टूटने के बाद आपूर्ति स्वत: बंद करने वाली ट्रिपिंग व्यवस्था ने काम क्यों नहीं किया और कंट्रोल रूम को समय पर जानकारी क्यों नहीं मिली? ऊर्जा निगम के जेई आकाश रस्तोगी ने बताया कि एलटी लाइन के तार अलग-अलग होने के कारण ट्रिपिंग नहीं हो सकी। हालांकि, ट्रिपिंग सिस्टम की तकनीकी स्थिति, लाइन टूटने के बाद आपूर्ति जारी रहने की वजह और निगरानी व्यवस्था की भूमिका स्पष्ट होने के लिए विभागीय जांच जरूरी है।
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Queries
गाजियाबाद के भोवापुर गांव में सास-बहू की मौत कैसे हुई?
गाजियाबाद में मूली उखाड़ने खेत में गईं सास और बहू की करंट लगने से मौत कैसे हुई?
भोवापुर गांव में बिजली की टूटी लाइन की चपेट में आने से किन महिलाओं की मौत हुई?
गाजियाबाद में सास-बहू को बचाने की कोशिश में देवश्री कैसे झुलस गईं?
गाजियाबाद के खेत में बिजली की लाइन टूटकर गिरने के मामले में बिजली विभाग की क्या लापरवाही सामने आई?
भोवापुर गांव में बिजली के करंट से दो महिलाओं की मौत के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
गाजियाबाद हादसे में जान गंवाने वाली सत्यवती और रूबी का परिवार कहां से आकर बसा था?
बिजली की टूटी लाइन से खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को कैसे खतरा हो सकता है?
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