निठारी कांड में आरोपों से बरी हो चुके मोनिंदर सिंह पंधेर ने सोमवार को सीबीआई अदालत में अपनी डी-5 कोठी की सील खुलवाने के लिए अर्जी दाखिल की। अदालत ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच एजेंसी ने निठारी कांड की पड़ताल के दौरान इस कोठी को वर्ष 2006 में सील किया था।
करीब 20 वर्ष पूर्व नोएडा के निठारी गांव में बच्चों और युवतियों के एक के बाद एक गायब होने का सिलसिला सामने आया था, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। शिकायतों के बावजूद शुरुआती दौर में पुलिस पर लापरवाही और अनदेखी के आरोप लगे। बाद में जांच आगे बढ़ी तो पंधेर के घर के पीछे के नाले से 19 कंकाल बरामद हुए। इसके बाद मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया।
मामला सीबीआई तक पहुंचा तो जांच एजेंसी को नाले से मानव हड्डियों के हिस्से और करीब 40 पैकेट मिले, जिनमें मानव अंग भरे हुए थे। साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने डी-5 कोठी को सील कर दिया था। 2009 में सीबीआई अदालत ने एक मामले में दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। इसके बाद कई मामलों में भी उन्हें फांसी और उम्रकैद की सजा दी गई।
वर्षों तक चले न्यायिक संघर्ष के बाद यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सर्वोच्च अदालत ने दोनों अभियुक्तों को निर्दोष करार दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोनिंदर पंधेर ने अब अपनी कोठी की सील खुलवाने की पहल की है। सोमवार को वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ सीबीआई कोर्ट पहुंचे और कोठी को रिलीज करने की औपचारिक अर्जी दाखिल की। अब कोर्ट ने इस बाबत सीबीआई से रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।