काली कमाई से ‘कुबेर’ बने यादव सिंह के सहयोगी माने जाने वाले सीए मोहन लाल राठी और उसकी पत्नी मीनाक्षी राठी के नाम गाजियाबाद में तीन दुकानें मिली हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने मोहनलाल राठी की गाजियाबाद में रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी का ब्यौरा मांगा था। सर्किल रेट के हिसाब से इन दुकानों की कीमत 1.12 करोड़ रुपये है, जबकि इसके लिए सिर्फ 37 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
पिछले माह प्रवर्तन निदेशालय के सहायक निदेशक त्रिगुण बिसेन ने गाजियाबाद एआईजी स्टांप जीपी सिंह को पत्र भेजकर यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता के एकाउंट में 50 लाख रुपये मंगवाने वाले सीए मोहन लाल राठी, उनकी पत्नी मीनाक्षी राठी, बेटा देवांश और बेटी तान्या राठी के नाम से गाजियाबाद में रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी का ब्यौरा मांगा था। एआईजी के आदेश पर इस मामले में जांच शुरू हुई तो कौशांबी के एक टॉवर में मोहन लाल राठी और उनकी पत्नी के नाम पर तीन दुकानें रजिस्टर्ड मिलीं।
पांचवें फ्लोर पर स्थित इन तीनों दुकानों को मेसर्स आंनद बिल्डटेक प्रा. लि. नामक फर्म से खरीदा गया है। इनमें एक दुकान खुद मोहन लाल राठी के नाम है, जबकि बाकी दो दुकानें मीनाक्षी राठी के नाम से रजिस्टर्ड कराई गईं हैं।
दो दुकानों की रजिस्ट्री 23 अक्तूबर 2013 को जबकि तीसरी दुकान की रजिस्ट्री 25 मार्च 2015 को कराई गई थी। रजिस्ट्री दफ्तर के रिकॉर्ड से पता चलता है कि मोहन सिंह राठी ने अपने नाम से जो दुकान खरीदी है, उसके लिए सिर्फ 13.25 लाख रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि इसके लिए सर्किल रेट यानि 46.53 लाख के हिसाब से स्टांप लगाया गया है।
इसी प्रकार मीनाक्षी के नाम से खरीदी गई दुकानों को क्रमश: 12.30 लाख और 7.92 लाख रुपये में खरीदा गया है, जबकि इनके लिए 40.38 लाख और 25.86 लाख के हिसाब से स्टांप लगाया गया है।
कोट्स
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पूर्व में मोहन लाल राठी के परिवार के नाम दर्ज प्रॉपर्टी का ब्यौरा मांगा गया था। अब रिपोर्ट बनाकर प्रवर्तन निदेशालय को भेज दी गई है।
- जीपी सिंह, एआईजी स्टांप एवं निबंधन