यदि आप अपने बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं करना चाहते हैं तो उनसे मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रानिक प्रोडक्ट्स दूर ही रखें। चिकित्सकों के मुताबिक तीन से 12 साल की उम्र के बच्चे मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स से बीमार हो रहे हैं। करीब 50 फीसदी बच्चे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के कारण लोनलीनेस, मेमोरी लॉस, अनिद्रा जैसी बीमारी की चपेट में हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. मुकेश सिंह के मुताबिक 3-10 वर्ष की छोटी सी उम्र में मोबाइल के इस्तेमाल से बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है।
आई स्पेशलिस्ट अनिल तिवारी का कहना है कि मोबाइल से बच्चों में आंखों से जुड़ी कई समस्याएं पैदा करती हैं। इन दिनों काफी संख्या में बच्चों की आंखों में दर्द रहना, धुंधला दिखाई देना, आंखों की नसें कमजोर होना और सिर दर्द की शिकायत आ रही हैं। उन्होंने बताया कि स्क्रीन देखने पर बच्चे सामान्य से कम आंखें झपकाते हैं, जिससे ड्राईआई की समस्या बढ़ जाती है।
अभिभावकों को होना होगा जागरूक
घर के काम निपटाने के लिए मम्मियां छोटे बच्चों को मोबाइल थमा देती हैं। इसके अलावा टीएचए में ज्यादातर पैरेंट्स वर्किंग हैं, ऐसे में बच्चे से संपर्क बनाए रखने के लिए वह छोटी उम्र से ही उन्हें मोबाइल दे देते हैं। यही कारण है कि बच्चा पार्क में खेलने जाने के बजाए फोन पर गेम, व्हॉट्सएप और यूट्यूब में लगा रहता और बीमार होता जाता है।
इनकी सुनिए
वैशाली सेक्टर-5 के 69 वर्षीय माहितोष सेन ने बताया कि पहले के जमाने में बच्चे खाली समय में दादा-दादी से कहानी सुनते थे, पार्कों में खेलने जाते थे। अब तो वह सारा दिन फोन में ही लगे रहते हैं।