कुत्ता काटने पर 24 घंटे के अंदर एंटी रैबीज वैक्सीन की पहली डोज लगनी जरूरी है। इसके बावजूद एमएमजी में 20 दिन से वैक्सीन खत्म है। ऐसे में यदि कुत्ता काटे तो एमएमजी में आना बेकार है। यहां पर वैक्सीन मिलने वाली नहीं है। एमएमजी के साथ ही अब सीएचसी- पीएचसी पर भी वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है।
अक्तूबर-नवंबर में बदलते मौसम में कुत्ते सबसे ज्यादा आक्रामक होते हैं। इनके काटने के मामले इन महीनों में ज्यादा आते हैं। कुत्ता काटने पर सबसे ज्यादा लोग सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं। एमएमजी में रोजाना करीब 250 लोग कुत्ता काटे के आते हैं। कुत्ता काटने के 24 घंटे के अंदर एंटी रैबीज वैक्सीन की पहली डोज लगनी जरूरी होती है।
इसके बावजूद एमएमजी में वैक्सीन 20 दिन से खत्म है। लगातार मांग के बावजूद अभी तक शासन से वैक्सीन नहीं भेजी गई हैं। अस्पताल से रोजाना कुत्ता काटे लोग वापस लौट रहे हैं या फिर उनको संजयनगर अस्पताल भेजा जाता है।सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाना वैसे भी टेढ़ी खीर है।
अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश घायल ऐसे होते हैं, जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीं होता है। बिना पहचान पत्र के वैक्सीन नहीं लगाई जाती है, ऐसे में उनको वापस लौटना पड़ता है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि वैक्सीन महंगे दाम में शासन से उपलब्ध होती है। इसको किनको लगाया गया, इसकी जांच करने लखनऊ से टीम आती है।
इसी कारण पहचान पत्र लाने की सलाह दी जाती है। जिससे उसका सही पता रजिस्टर में दर्ज हो सके। सीएमएस डॉ. जेके त्यागी ने बताया कि वैक्सीन खत्म होने की जानकारी शासन को दी जा चुकी है। इसके लिए रिमाइंडर भी भेजा गया है। सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि सीएचसी-पीएचसी पर अभी दवाएं उपलब्ध हैं। जल्द ही एमएमजी में भी वैक्सीन पहुंच जाएगी।