मानसिक तनाव कम करने के लिए अपनों से करें बातचीत - लॉकडाउन में बढ़ नौकरी व बैंक की किस्त को लेकर बढ़ गया है तनाव माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। लगभग तीन महीने तक चले लॉक डाउन के कारण मानसिक तनाव बढ़ने लगा है। लोग अवसाद ग्रस्त हो रहे हैं। मनोरोग चिकित्सक और मनोवैज्ञानिकों के पास सलाह लेने के लिए आने वाली फोन कॉल में 50 फीसदी से ज्यादा घरों में कैद ऐसे पुरुषों के हैं जो डिप्रेशन के शिकार हो गए हैं। लॉकडाउन के चलते बिजनस, नौकरी, बचत और यहां तक कि मूलभूत संसाधन खोने के डर से लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और नेगेटिव विचार हावी हो रहे हैं। घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं तो बच्चे भी अछूते नहीं हैं। लॉकडाउन की अवधि लंबी होने के चलते घरों में कैद लोगों के दिनचर्या में बदलाव का असर मनोविकार के रूप में सामने आने लगा है। पुरुषों को नौकरी से निकाले जाने व बैंक की किस्त अदा करने की चिंता ज्यादा सता रही है। 60 फीसदी से ज्यादा पुरुष डिप्रेशन में संवेदना मेंटल हेल्थ सोसायटी की सदस्य डा. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि बड़ी संख्या में आए फोन में 60 फीसदी से ज्यादा कॉल पुरुषों के अवसाद, तनाव और एंजाइटी से ग्रस्त होने से संबंधित हैं। लोगों को नींद न आना और भूख न लगना, बार-बार रोने का मन होना या फिर बिना कारण किसी काम को बार-बार करना जैसी समस्या है। गुस्सा सातवें आसमान पर होने से पत्नियां घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। बच्चों पर भी छोटी बातों पर हाथ उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में लोगों को चिंता, अवसाद और तनाव से निकालना बड़ी चुनौती होगी। बिजनस में असर से डिप्रेशन में लोग लॉकडाउन में हर कोई किसी न किसी कारण तनाव में है। छात्रों को शिक्षा से जुड़ी चिंता तनाव की ओर ले जा रही है। मोबाइल पर ज्यादा समय व्यस्त रहना भी मानसिक बीमारी की बड़ी वजह बना है। उधर, कामकाजी लोगों के रहन-सहन में अप्रत्याशित तब्दीली या फिर बिजनेस पर असर से परेशान लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोगों को दिनचर्या में बदलाव के साथ सकारात्मक सोच और कुछ नया करने की सलाह दी जा रही है। घरेलू हिंसाएं बढ़ी डा. हेमिका बताती हैं कि उनके पास आई तमाम फोन कॉल से उन पुरुषों के व्यवहार में ज्यादा बदलाव का पता चला है जो कोई न कोई नशा करते रहे हैं। बायोलॉजिकल क्लॉक डिस्टर्ब होने, आर्थिक तंगी, कोरोना के चलते नौकरी जाने का डर भी लोगों के व्यवहार में बदलाव और मानसिक विकार का कारण बना है। ऐसे में घरेलू हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। मां-पिता के बदले व्यवहार से बच्चे भी जिद्दी हो रहे हैं। महिलाओं के व्यवहार में भी बदलाव वरष्ठि मनोचिकित्सक डा. आर चंद्रा की मानें तो उनके पास आने वाले फोन में ज्यादातर घरेलू महिलाओं के व्यवहार में परिवर्तन से संबंधित रहे हैं। चौबीस घंटे घर में रहने के दौरान पुरुष और महिलाओं की अलग-अलग आदत और रुचि एक-दूसरे पर भारी पड़ रही है। इनसे करें व्यवहार में बदलाव - लोगों से बातचीत करें। - सकारात्मक व्यवहार बनाए रखने के लिए दिन में सोने के बजाए रात में पूरी नींद लें। - सुबह के समय योग करें। - खाने में सलाद व हरी सब्जियां जरूर शामिल करें। - अपनी रुचि के अनुसार कोई भी पुस्तक पढ़ें - अधिक समय तक टीवी न देखें। - अगर किसी तरह का तनाव का अनुभव कर रहे हैं तो किसी मनोकाउंसलर से संपर्क करें। ------------------------ आशुतोष यादव