10 लाख की क्रेडिट लिमिट जारी करने के बदले मांगे थे चार लाख रुपये
14 अक्तूबर को फिर होगी सुनवाई
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मथुरा के यूको बैंक में क्रेडिट लिमिट की रोकी गई रकम जारी करने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में तत्कालीन सीनियर मैनेजर गरिमा सिंह और उनके निजी सहयोगी आरिफ मोहम्मद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अर्जी पर सीबीआई की विशेष अदालत में बहस हुई। सुनवाई जारी रखते हुए अदालत ने अगली तारीख 14 अक्तूबर तय की है।
सीबीआई के अनुसार, मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र स्थित मंडी चौक निवासी मुरारी लाल राधाकृष्ण फ्लोर मिल के संचालक हैं। उन्होंने अपनी फर्म के लिए कोतवाली रोड स्थित यूको बैंक से एक करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत कराई थी। बैंक ने 90 लाख रुपये खाते में स्थानांतरित कर दिए, जबकि शेष 10 लाख रुपये रोक लिए थे।
आरोप है कि रोकी गई रकम जारी करने के बदले तत्कालीन सीनियर मैनेजर गरिमा सिंह ने चार लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने पर सीबीआई ने जांच शुरू की। रिश्वत की रकम दो किस्तों में देने पर सहमति बनी थी।
सीबीआई के मुताबिक, सितंबर 2025 में मुरारी लाल के बेटे सोनू ने पहली किस्त के रूप में दो लाख रुपये गरिमा सिंह और उनके निजी सहयोगी आरिफ मोहम्मद को बैंक शाखा के बाहर कार में दिए थे। इसी दौरान सीबीआई ने दोनों को कथित तौर पर रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया था। अब अदालत में दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अर्जी पर सुनवाई हो रही है।