रसोई गैस की बढ़ी कीमतों ने जहां गृहणियों को टेंशन दी थी, वहीं दाल-चावल और आटा सस्ता होने से उन्हें अच्छे दिनों का अहसास भी होने लगा है। इस बार हुई दलहन-तिलहन की बंपर पैदावार से बाजार और ग्राहक दोनों खुश हैं।
दाल के दामों में जहां 80 से 90 रुपये प्रतिकिलो तक की गिरावट आई है, वहीं सरसों, सोया, मूंगफली, रिफाइंड ऑयल के साथ आटा, चावल, चीनी और अन्य रोजमर्रा का सामान भी सस्ता हुआ है। किराना व्यापारियों की माने तो आने वाले समय में दालों के रेट में और भी कमी आएगी।
ऐसे में इस बार होली के त्योहार रंगों की मस्ती के साथ आम आदमी की जेब भी खनकती रहेगी।कुछ माह पहले तक दालों की कीमतें जो आसमान छू रहीं थी, अब उनमें काफी गिरावट आई है। राम नगर किराना मंडी के व्यापारी नरेंद्र चड्ढा ने बताया कि दालों की कीमतें 50 फीसदी तक गिर गई हैं। इससे ग्राहकों के साथ-साथ व्यापारियों को भी फायदा है।
तेल, चीनी, आटा और चावल के गिरते रेट ने रसोई के खर्च को कम कर दिया है।
दालों की कीमतें (प्रति रुपये किलो)
दाल वर्तमान कीमत पूर्व की कीमत
अरहर दाल 70 180-200
चने की दाल 65 130
उड़द छिलका 80 160
उड़द धुली 90 160
काली मसूर 70 130
मलका मसूर 70 140
मूंग (छिलका) 75 160
मूंग (धुली) 75 170
सरसो का तेल 80 90
सोया रिफाइंड 80 110
ऑलिव ऑयल 250 350
मूंगफली तेल 170 190
आटा 290 300-310
दूसरी ओर हरी सब्जियों के दामों में भी गिरावट हुई है। जटवाड़ा सब्जी मंडी में फुटकर विक्रेता आरके गुप्ता ने बताया कि अभी आसपास के खेतों से मौसमी सब्जियां आ रही हैं, इसलिए वह सस्ती हैं। होली के बाद सर्दियों वाली सब्जियां खत्म हो जाएंगी और गर्मी के मौसम वाली सब्जियाें के आने का समय होगा।
तब मंडी में जो सब्जियां होंगी वह कुछ महंगी हो सकती हैं।
हरी सब्जियों की कीमतें
जटवाड़ा सब्जी मंडी में मौसमी रही सब्जियां सस्ती हैं। विक्रेताओं की मानें तो आलू 10 रुपये प्रति किलो, प्याज 12 रुपये किलो, टमाटर 20 रुपये किलो, कद्दू 10 से 12 रुपये किलो, हरी मटर 10 रुपये किलो, बैगन 30 रुपये किलो, लौकी 15 से 20 रुपये किलो, खीरा 25 रुपये किलो,
गोभी 10 से 15 रुपये किलो, पत्ता गोभी 10 रुपये किलो, शिमला मिर्च 30 रुपये किलो और गाजर 12 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
आलू की हुई बंपर पैदावार
दूसरी ओर आलू की पैदावार के लिए प्रदेश में पहचान बनाने वाले हापुड़ में पाला, कोहरा और किसी बीमारी का प्रकोप नहीं होने और मौसम अनुकूल रहने से इस बार आलू की पैदावार भी बंपर हुई है। हालांकि इसके बावजूद मंदी की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कोल्ड स्टोर का किराया और बिचौलियों की दलाली हर बार किसानों पर भारी पड़ती है।
खुले बाजार में जो आलू 10 से 15 रुपये किलो बेचा जाता है वह किसानों से मात्र 2 से तीन रुपये किलो कि हिसाब से ही खरीदा जाता है। यही कारण है कि आलू का पिछला सीजन भी बुरी तरह से पिटा था। किसानों को शीतगृहों का किराया भी अपने पास से देना पड़ा था। बहुत से किसान तो शीतगृहों में ही आलू छोड़ गये थे।
इस समय 3797 आलू का रेट 200 से 250 रुपये कट्टा है, जबकि ख्याति और खुफरी बादशाह आलू का रेट 150 रुपये कट्टा है। एक कट्टा में 52 किलो आलू भरा जाता है। उधर, आलू भंडारण का किराया इस सीजन में शुगर फ्री 250 रुपये क्विंटल और सादा आलू 220 रुपये क्विंटल तय किया गया है। किसान इसे काफी महंगा बता रहे हैं।