विकलांगता को अपनी कमजोरी न समझें, इसे मौके में तब्दील करें। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता। सामान्य दिखने वाला व्यक्ति भी अंदर से मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है। ऐसे में अपने अंदर की क्षमता को पहचान कर उसे कामयाबी की सीढ़ी बनाएं।
आज लड़कियां और दिव्यांग हर काम करने में सक्षम हैं। यह बातें आशा विद्यालय में पहुंची वर्ष 2015 की आईएएस टॉपर इरा सिंघल ने कहीं। इरा ने कहा कि उनके परिवार ने उन्हें यह अहसास कभी नहीं दिलाया गया कि वह अन्य बच्चों से अलग हैं।
बचपन से ही वह पढ़ाई से लेकर खेलकूद में सब में आगे रहीं। ऐसे में उन्हें हमेशा सर्वश्रेष्ठ ही समझा गया। क्लास में भी वह हमेशा मॉनिटर रहीं। इरा ने बताया कि यह सुखद अनुभव उनका अपना है लेकिन हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता।
उन्होंने कहा दिव्यांग हो या लड़कियां होश संभालने के साथ ही उन्हें हमेशा यह अहसास दिलाया जाता है कि वह औरों से कमजोर हैं। लड़कियों से कहा जाता है कि लड़कों से बचकर रहें। इससे लड़कियां मानसिक तौर पर कमजोर हो जाती हैं।
ऐसा ही दिव्यांगों के साथ भी होता है। लेकिन एक बात समझनी होगी। कोई भी व्यक्ति संपूर्ण नहीं होता। हर किसी का कोई न कोई कमजोर या मजबूत पक्ष होता है। लड़कियों और दिव्यांगों को अपने इसी मजबूत पक्ष पर फोकस करना चाहिए।
यही उनका कामयाबी की राह पर ले जाएगा। मैंने भी यही किया। उन्होंने कहा कि वह नौकरी में रहते हुए लड़कियों और दिव्यांगों को सशक्त बनाने का काम करती रहेंगी।
दिव्यांगों के लिए आयोजित हुई कार्यशाला
डिसएबल्ड हेल्पलाइन फाउंडेशन की ओर से जीटी रोड स्थित आशा विद्यालय में दिव्यांगों के लिए प्रेरक कार्यशाला आयोजित की गई। साथ ही दिव्यांग जनों के लिए रोजगार मेला और हेल्थ चेकअप कैंप भी लगाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर वर्ष 2015 की आईएएस टॉपर इरा सिंघल और भारत की पहली नेत्रहीन प्रोफेसर डा. प्रेम सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यशाला में शामिल दिव्यांग जनों को संबोधित करते हुए इरा सिंघल और प्रोफेसर प्रेम सिंह ने कहा हर किसी के जीवन में बाधाएं होती हैं।
इन बाधाओं को बाधा मानो तो यह बड़ी बन जाती हैं नहीं तो इसके पार जाकर लोग अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। समाजसेवी पंडित विकास शर्मा भी दिव्यांग जनों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में जीएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ओर से नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य तौर पर इंग्राहम स्कूल की प्रिंसिपल मोहिनी सैंपसन, आशा विद्यालय के प्रधानाचार्य अनुराग किशोर, आनंद प्रकाश, ललिता मैसी, मनोज कौशिक, पंकज बंसल, मनीष पवार आदि मौजदू रहे।