गाजियाबाद की लोनी तहसील के किसानों की जमीनें बिना मुआवजा दिए अधिग्रहीत करने के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश सरकार झुक गई है। शनिवार को शासन की ओर से उपस्थित सचिव ने अंडरटेकिंग देकर बताया कि सरकार ने अधिग्रहीत भूमि को डी-नोटीफाई करने का निर्णय लिया है।
इसके बाद राजस्व रिकार्ड में किसानों का नाम वापस चढ़ा दिया जाएगा। सरकार हर्जाने की एक करोड़ रुपये की राशि भी हाईकोर्ट में जमा करने को तैयार है। किसान सुरेंद्र कुमार और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता विनोद सिन्हा और महेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने किसानों की सौ एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहीत करने के बाद यूपीएसआईडीसी को दे दी। बाद में निगम जमीन सरकार को वापस कर दी। इसके बावजूद किसानों को न तो जमीनें वापस मिली और न ही मुआवजा।
प्रदेश सरकार का कहना था कि राजस्व अभिलेखों में यूपीएसआईडीसी का नाम दर्ज हो चुका है। बिना मुआवजा दिए भूमि अधिग्रहीत करने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार पर एक करोड़ रुपये हर्जाना लगा दिया था। सरकार ने हर्जाना जमा करने के बजाए रिकॉल अर्जी दाखिल कर दी।
इससे नाराज होकर कोर्ट ने सचिव और अन्य अधिकारियों को तलब किया था। सचिव की अंडरटेकिंग के बाद 27 सितंबर तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है।