बुलंदशहर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाली सबसे महत्वाकांक्षी योजना ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। जिला प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने का रास्ता साफ हो गया है। इस अधिसूचना के साथ ही प्रभावित होने वाले 39 गांवों के भू-स्वामियों से 10 दिनों के भीतर दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके निस्तारण के तुरंत बाद प्रशासन भूमि अधिग्रहण की अंतिम कार्रवाई शुरू कर देगा।
इस प्रोजेक्ट की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुलंदशहर जनपद की पांच तहसीलों के करीब 8700 किसानों की भूमि इस एक्सप्रेसवे की जद में आएगी। कुल 677 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। पिछले एक साल से यह योजना फाइलों और कागजी प्रक्रियाओं में अटकी हुई थी, लेकिन अब शासन से हरी झंडी मिलने के बाद एडीएम (प्रशासन) और संबंधित एसडीएम ने मोर्चा संभाल लिया है।
अधिसूचना के मुताबिक, यदि किसी किसान की गाटा संख्या, क्षेत्रफल या खतौनी में दर्ज नाम को लेकर कोई विसंगति है, अथवा किसी अन्य व्यक्ति का उस भूमि में कोई वैध हित निहित है, तो वह साक्ष्यों के साथ संबंधित तहसील के एसडीएम कार्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। 10 दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा और अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
इन 39 गांवों में हलचल तेज: तहसीलवार सूची
1. खुर्जा तहसील के गांव:
अमानुल्लापुर उर्फ मारहरा, इनायतपुर उर्फ मधुपुरा, कपना, भगवानपुर, हसनपुर लडूकी, बीघेपुर, सनैता शफीपुर, भदौरा, वरतौली, खवरा, धरारी, दीनौल, खलसिया चूहरपुर, विचौला और धरांऊ।
2. बुलंदशहर तहसील के गांव:
औरंगाबाद, हिंगथला उर्फ भावसी, चरौरा मुस्तफाबाद, सैदपुरा, इस्माइला, सराय छबीला, अडौली, दोहली, चिरचिटा, मामन खुर्द, मामनकलां, भाईपुर, ऐमनपुर, कलौली, बंगला पूठरी और पिपाला।
इसके अलावा स्याना, शिकारपुर और अनूपशहर तहसीलों के भी कई महत्वपूर्ण गांव इस रूट का हिस्सा हैं, जिनकी विस्तृत सूची तहसील मुख्यालयों पर चस्पा कर दी गई है।
आर्थिक क्रांति का बनेगा आधार
यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक इकनॉमिक कॉरिडोर साबित होगा। गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच इस सीधे लिंक से बुलंदशहर, हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश की बाढ़ आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के दोनों ओर वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक हब और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित होंगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे। वहीं, किसानों के लिए भी यह सौदा मुनाफे वाला साबित हो सकता है। सर्किल रेट से कई गुना अधिक मुआवजे के साथ-साथ, एक्सप्रेसवे के किनारे की जमीन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। प्रशासन का कहना है कि मुआवजा वितरण पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से होगा ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
सफर होगा सुगम, समय की होगी बचत
वर्तमान में बुलंदशहर से जेवर एयरपोर्ट जाने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है और संकरी सड़कों के कारण समय भी अधिक लगता है। ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी सिमट जाएगी। यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल्ड होगा, जिससे वाहन फर्राटा भर सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी।
कोट
शासन की प्राथमिकता के आधार पर इस प्रोजेक्ट को गति दी जा रही है। अधिसूचना जारी कर दी गई है। 10 दिन के भीतर प्राप्त होने वाली आपत्तियों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा, जिससे कि जल्द से जल्द किसानों को मुआवजे का भुगतान कर निर्माण कार्य शुरू कराया जा सके। - प्रमोद कुमार, एडीएम प्रशासन